तहलका न्यूज,बीकानेर।बिना पक्ष सुने जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।इसी सिद्धांत के आधार पर राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग सर्किट बैंच बीकानेर ने नोखा के तहसीलदार को बड़ी राहत दी है।आरीटीआई में अप्रमाणित दस्तावेज देने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने तहसीलदार पर 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था।लेकिन राज्य आयोग ने उस एकपक्षीय आदेश को ही रद्द कर दिया।

यह था मामला
नोखा निवासी फूलाराम बिश्नोई ने आरीटीआई के तहत तहसीलदार कार्यालय से कुछ दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं।इसके लिए 30 रु पए का शुल्क भी जमा कराया।आरोप है कि कार्यालय से उन्हें सिर्फ 14 पेज की बिना प्रमाणित कॉपी दी गई।इस पर फूलाराम ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद लगाया।सुनवाई में तहसीलदार हाजिर नहीं हुए तो आयोग ने 21 मई 2025 को एकपक्षीय फैसला सुनाते हुए प्रमाणित प्रतियां देने के साथ 10 हजार रुपए मानसिक वेदना और 5 हजार रुपए परिवाद व्यय देने के आदेश दिए थे।जिला आयोग के आदेश के खिलाफ तहसीलदार नोखा ने एडवोकेट अनिल सोनी के मार्फत ने राज्य आयोग में अपील दायर कर जिला आयोग के फैसले को चुनौती दी।जिस पर सदस्य न्यायिक अरुण कुमार अग्रवाल और सदस्य दिनेश कुमार की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कि सी भी व्यक्ति को सजा या जुर्माना देने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर देना प्राकृतिक न्याय का हिस्सा है।जिला आयोग ने यह प्रक्रिया नहीं अपनाई।इसी आधार पर राज्य आयोग ने जिला आयोग के आदेश को निरस्त कर पूरे मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए जिला आयोग को वापस भेज दिया है।

अब क्या होगा आगे
राज्य आयोग के आदेश के बाद तहसीलदार को फिलहाल 15 हजार रुपए के भुगतान से राहत मिल गई है।अब जिला उपभोक्ता आयोग,बीकानेर दोनों पक्षों को सुनकर तथ्यों और कानून के आधार पर नया फैसला सुनाएगा।तहसीलदार नोखा की ओर से पैरवी एडवोकेट अनिल सोनी ने की।