जयनारायण बिस्सा
तहलका न्यूज,बीकानेर।करीब दो साल बाद होने जा रहे निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।चुनाव की तैयारियों के साथ ही कांग्रेस और भाजपा में टिकट के दावेदार भी सक्रिय हो गए हैं।सोमवार को भी दोनों प्रमुख दलों के कार्यालयों में आवेदन जमा कराने का सिलसिला चला।वार्ड स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढऩे के साथ शहर में चुनावी माहौल बनने लगा है।जहां भाजपा ने सोमवार दोपहर बाद आवेदन देने की प्रक्रिया पर विराम लगा दिया है।तो वहीं कांग्रेस की ओर से अब भी आवेदन लिए जा रहे।बताया जा रहा है कि भाजपा में 845 जनों ने आवेदन फॉर्म लिये है।जिसमें से करीब दो मंडलों को छोड़कर अब तक 512 आवेदकों ने अपने फॉर्म वापस जमा करवा दिए।तो वहीं कांग्रेस में अब तक 637 आवेदन हुए है।आवेदन प्राप्ति के बाद पार्टी स्तर पर प्राप्त आवेदनों की समीक्षा की जाएगी।प्रत्याशियों के अंतिम चयन की प्रक्रिया हाईकमान के निर्देश के अनुसार आगे बढ़ेगी।पार्टी की ओर से करीब तीन से चार दिन में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना जताई गई है।
स्थानीय चेहरे बनाम नए दावेदार
टिकट की दौड़ बढऩे के साथ दोनों दलों के सामने उम्मीदवारों का चयन बड़ी चुनौती बन गया है।संगठन में लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं के अलावा युवा,अनुभवी नेता,पूर्व पार्षद और पहली बार चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे नए चेहरों ने भी दावेदारी जताई है।स्थानीय स्तर पर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि पार्टियां किसे मौका देती हैं।लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय नेताओं को टिकट मिलेगा या नए चेहरों पर भरोसा किया जाएगा,इसे लेकर कार्यकर्ताओं में उत्सुकता बनी हुई है।बताया जा रहा है कि महापौर का पद अनारक्षित होने के कारण विधानसभा का टिकट मांग रहे पूर्व न्यास अध्यक्ष महावीर रांका 12,50 और 75 नं वार्ड से दावेदारी कर रहे है।तो पूर्व महामंत्री मोहन सुराणा स्वयं 8 नंबर वार्ड से तो अपनी पत्नी को 28 नंबर वार्ड से चुनावी रण में उतारने की तैयारी में है।इसी तरह चंपालाल गेधर स्वयं सहित बेटे और पुत्र वधु के लिये टिकट मांग रहे है। गेदर ने स्वयं ने वार्ड 8,उनके बेटे ने 32 व पुत्र वधु नं 31 से आवेदन किया है।इस दौड़ में पार्टी के पदाधिकारी भी पीछे नहीं है।उपाध्यक्ष दीपक पारीक वार्ड 73,राजेन्द्र पंवार वार्ड ,अशोक प्रजापत वार्ड 38,देहात प्रवक्ता मनीष सोनी वार्ड 8,महामंत्री श्याम सिंह हाडलां वार्ड 37,भूपेन्द्र शर्मा वार्ड 32,जिला मंत्री किशन चौधरी वार्ड 63 व सरिता नाहटा वार्ड 28 से दावेदारी जता रही है।इनके अलावा पांच मंडल अध्यक्ष भी षार्षद बनने की कतार में है।इन्होंने भी आवेदन किया है। इनके अतिरिक्त पूर्व अध्यक्ष शशि कांत शर्मा ने वार्ड 42 से,गोपाल अग्रवाल वार्ड 62 से,पूर्व महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित वार्ड 14,पूर्व पार्षद किशोर आचार्य वार्ड 60,पूर्व उपमहापौर अशोक आचार्य वार्ड 60,अनिल शुक्ला व सुरेन्द्र सिंह शेखावत वार्ड 12,डॉ भगवान सिंह मेडतिया वार्ड 13,पूर्व मंडल अध्यक्ष जे पी व्यास वार्ड 43,डॉ अशोक भाटी वार्ड 34,बाबूलाल गहलोत वार्ड 47 से चुनाव लडऩे की इच्छा पार्टी को जता चुके है और आवेदन किया है।बात करें मंडल अध्यक्षों की तो दो मंडल अध्यक्ष भी पार्षद की टिकट के लिये दावेदारी कर रहे है।इसमें गोपेश्वर बस्ती मंडल अध्यक्ष प्रेम प्रकाश गहलोत वार्ड तीन से तथा नयाशहर मंडल अध्यक्ष विशाल गोलछा वार्ड 75 से अपनी मजबूत दावेदारी जता रहे है।ऐसा माना जा रहा है कि इन दोनों मंडल अध्यक्षों के लिये विधायक जबरदस्त पैरवी कर रहे है।
पैराशूट उम्मीदवारों की चर्चा से बढ़ी बेचैनी
टिकट वितरण से पहले बाहरी या पैराशूट प्रत्याशियों को मौका दिए जाने की चर्चाओं ने भी स्थानीय दावेदारों की चिंता बढ़ा दी है।स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि वार्ड की समस्याओं और मतदाताओं से सीधा जुड़ाव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।अब दोनों दलों की नजर ऐसे चेहरों पर है,जो संगठन के साथ-साथ अपने वार्ड में भी मजबूत पकड़ रखते हों।टिकट वितरण के बाद तस्वीर और साफ होगी।फिलहाल आवेदन प्रक्रिया के साथ निकाय चुनाव की सियासी सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है।
इन मंडलों से भरे गये इतने आवेदन
भाजपा की ओर से शहर के पूर्व व पश्चिम विधानसभाओं में बने दस मंडलों में आवेदन जमा करने की प्रक्रिया रखी गई।जिसमें लालगढ़ मंडल में 82 जनों ने पार्षद के लिये टिकट मांगा है।इसी तरह जूनागढ़ मंडल में 83,शिवबाड़ी मंडल में 46,गंगाशहर मंडल में 57,नयाशहर मंडल में 42,गोपेश्वर मंडल में 88,जस्सूसर गेट मंडल में 67 और मुक्ता प्रसाद मंडल में 47 जनों ने आवेदन किये है।
दो मंडल संख्या देने से कतरा रहे
हालात यह है कि जहां आठ मंडल अध्यक्षों ने जहां आवेदकों की संख्या बता दी।वहीं रानीबाजार मंडल अध्यक्ष व पुराना शहर मंडल अध्यक्ष आवेदकों की संख्या देने से कतराते नजर आएं।सूत्र बताते है कि इनके पास जमा आवेदनों में संख्यात्मक गड़बड़ी हो सकती है।जिसके चलते ये दोनों मंडल अध्यक्ष संख्या देने से बचते रहे।
