

तहलका न्यूज,बीकानेर।करीब सात साल बाद हुए नगर निगम के चुनाव के परिणाम 14 सितम्बर को घोषित होगा। जिसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।लोगों में इस बात को लेकर उत्सुकता है कि आखिर हमारे वार्ड का सरताज कौन होगा।सुबह से लेकर देर रात तक चौकों,पाटों,चाय की थड़ी सहित दुकानों पर इस बात की चर्चा होती है कि बोर्ड कौन बनाने जा रहा है,कौन महापौर बनेगा।जिले की नगरपालिकाओं में किस पार्टी का अध्यक्ष होगा।मतदान के बाद से इसका सर्वे किया तो सामने आया है कि बीकानेर नगर निगम में इस दफा कांग्रेस को बढ़त के साथ महापौर की कुर्सी मिल सकती है।वहीं पार्टी के प्रति नाराजगी के चलते भाजपा को खासा नुकसान हो सकता है।जब हमारी टीम ने इस बारे में लोगों की राय जानी तो इसके पीछे बड़ा कारण यूजीसी रोल बैक के अलावा पिछले ढाई सालों में शहर के विधायकों की निष्क्रियता मुख्य कारण बताया गया। इतना ही नहीं टिकट वितरण के बाद उपजे विवाद को भी भाजपा के पिछडऩे की एक वजह बताई गई।जिसके बाद से दोनों ही पार्टियों ने अपने अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी कर निर्दलीयों को भी कब्जे में करना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस को बढ़त,भाजपा को नुकसान
पिछले चुनाव की तुलना में इस बार निश्चित तौर पर दो प्रतिशत अधिक मतदान जरूर हुआ है।इसका असर परिणामों पर देखने को मिलेगा। गत चुनाव में भाजपा को 38 सीटें मिली थी और कांग्रेस 30 सीटों पर सिमट गई थी। हालांकि दोनों ही दलों के 11 बागी भी चुनाव जीते थे और एक सीट पर बसपा का कब्जा रहा।परन्तु जोड़तोड़ की राजनीति में भाजपा ने कांग्रेस को मात देकर लगातार दूसरी बार अपना मेयर बना लिया था। परन्तु अबकी बार जनता बदलाव के मूड में दिखी।जिसका खामियाजा संभवत भाजपा को भुगतना पड़ सकता है।टिकट वितरण से उपजे विवाद के बाद कांग्रेस को इसका लाभ कही न कही मिल सकता है।सट्टा बाजार भी कांग्रेस को भाजपा के मुकाबले अधिक सीटें दे रहा है। वहीं भाजपा के अन्दुरूनी सर्वे में भी नगर निगम उसके हाथ से खिसकता नजर आ रहा है।ऐसे में कांग्रेस इस बात को लेकर आशान्वित है कि नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बन जाएगा।अगर आंकलन की बात करें तो कांग्रेस 35 से 41 सीटें जीतती दिख रही है।वहीं भाजपा 30 सीटों में सिमट सकती है।अंदेशा लगाया जा रहा है कि भाजपा इस चुनाव में 22 से 25 सीटें ही जीत पाएगी। वहीं निर्दलीयों का परिवार बढ़ सकता है।वे गत चुनाव से एक दो सीटें अधिक ला सकते है या रालोपा जैसी पार्टी भी अपना खाता खोल सकती है।
महापौर को लेकर भी मंथन शुरू
उधर दोनों ही पार्टियों में महापौर को लेकर मंथन शुरू हो गया है। अगर कांग्रेस का बोर्ड बनता है तो महापौर के लिये अनिल कल्ला के साथ धर्मवीर नाहटा,नवरतन डागा और दिलीप बांठिया के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे है।वहीं मकसूद अहमद भी कांग्रेस से महापौर बनने का दावा कर सकते है।तो भाजपा राजपूत समाज के पार्षद को पहली वरियता देते नजर आ रहा है।यदि प्रमुख राजपूत समाज के पार्षद प्रत्याशी चुनाव नहीं जीतते तो ब्राह्मण समाज पर भाजपा भरोसा जता सकती है।भाजपा के अन्दुरूनी सर्वे में अधिकांश प्रमुख प्रत्याशी चुनाव हारने की कगार पर है।इन सब प्रत्याशियों को इन्हीं के बागियों की वजह से चुनाव में मात मिल सकती है।जिसकी वजह से महापौर की दावेदारी में केवल दो युवा नेताओं राजपूत नेताओं के अलावा एक ब्राह्मण नेता पर दावं भाजपा खेल सकती है। हालांकि कांग्रेस में भी इस बात को लेकर कलह बनी हुई है।जहां मदन गोपाल मेघवाल और डॉ बी डी कल्ला की पसंद मेल नहीं खा रही तो देहात अध्यक्ष बिसनाराम व गोविन्दराम मेघवाल भी शहर की सरकार बनवाने में अपनी टांग अड़ाते दिख रहे है।ऐसे में कांग्रेस के लिये मेयर को लेकर एक राय हो पाना टेढ़ी खीर है।
इन निर्दलीयों पर रहेगी नजर
दोनों ही पार्टियों ने अपने अन्दुरूनी सर्वे में वार्ड नं 2,3,10,22,25,26,32,41,43,44,46,54,61,62,63,72 के निर्दलीय उम्मीदवारों पर टिकटिकी लगाएं बैठी है। इन पार्टियों के रणनीतिकार मान रहे है कि ये वो वार्ड है,जहां भाजपा-कांग्रेस के लिये निर्दलीय उलझन पैदा कर सकते है।इनमें से कुछ वार्ड तो निश्चित तौर पर निर्दलीयों जीत रहे है। अब देखना है कि कौनसे वार्ड में निर्दलीय मजबूती के साथ दोनों ही दलों को मात देकर किस पार्टी की ओर रूख करते है। इनकी जीत की संभावना के मद्देनजर भाजपा ने अपने एक नेता को इस कार्य मेंं लगा दिया है।अंदरखाने से खबर है कि कुछ निर्दलीयों को तो इस भाजपा नेता ने अपने बांडेबंदी में रख लिया है।जबकि कुछ उनकी पकड़ से दूर है।वैसे कांग्रेस के रणनीतिकारों का दावा है कि वे 45 सीटों तक का आंकड़ा छू सकते है।जबकि भाजपा 30 से 32 तक सीटें जीतने की उम्मीद लगाएं बैठी है।ऐसे में दोनों ही दलों ने अब महापौर बनाने के लिये शतरंज की बिसात बिछानी शुरू कर दी है।
सोमवार को 12 बजे तक हो जाएगी स्थिति साफ
गणेश चतुर्थी को घोषित परिणामों के चलते लगभग 12 बजे तक यह साफ हो जाएगा कि आखिर जिले की पांच पालिकाओं व नगर निगम में कि सी पार्टी की सरकार बनेगी।ये परिणाम निश्चित तौर पर जिले के वरिष्ठ नेताओं व आगामी दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों के परिणामों की राजनीति तय करेंगे।
