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तहलका न्यूज,बीकानेर। क्या आप भी बाजार से देशी घी खरीदकर खाते हैं।कहीं ऐसा तो नहीं कि आप देशी घी के नाम पर जानवरों की चर्बी से तैयार किए जा रहे घी का प्रयोग कर रहे हैं।यदि ऐसा है तो सतर्क हो जाएं।नगर निगम की ओर से जोड़बीड़ पर मृत पशुओं की चर्बी से घी बनाने का गौरखधंधा चल रहा है।बीकानेर तहलका न्यूज की टीम ने जब जोड़बीड़ क्षेत्र का अवलोकन किया तो पाया कि यहां बड़े बड़े ड्रम में चर्बी रखी हुई थी।जो सफेद रंग की थी।इतना ही नहीं कुछ कडाव भी देखने को मिले।यहां जानवरों के शेष अवशेष सुखाएं हुए थे।इन अवशेषों को कडाव में गर्म कर इनकी चर्बी से घी जैसा पदार्थ तैयार कर ड्रमों में भरा जाता है।बाद में इन्हें बीकानेर से बाहर सप्लाई कर दिया जाता है। बीकानेर तहलका टीम के पास जयपुर व नागौर नंबर की गाड़ी में इन ड्रम को लोड कर भेजने के साक्ष्य भी उपलब्ध है।बताया जा रहा है कि जिस ठेका कंपनी को मृत पशुओं को उठाने का काम नगर निगम ने दे रखा है।उसी कंपनी के लोग इस काम को अंजाम दे रहे है।जिसके चलते आमजन को मिलावटी घी खाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

लंबे समय से चल रहा है,इस प्रकार का काम
ऐसा नहीं है कि जोड़बीड़ में जानवरों की चर्बी से घी बनाने का काम पहली बार हो रहा है।यह गौरखधंधा पिछले कई वर्षों से किया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नागौरी स्क्रीन कंपनी को मृत पशु उठाने का ठेका मिला हुआ है।जिसके तीन पार्टनर बताएं जा रहे है।यह फर्म शहर के मृत पशुओं को उठाकर जोड़बीड़ में फैकती है।यहां आमतौर पर निगम के अधिकारियों का कोई निरीक्षण नहीं होता। यहां पशुओं के अवशेषों को कड़ाव में उबाला जाकर उन्हें सुखाया जाता है।फिर चर्बी का उपयोग घी बनाने तथा चमड़ी व हड्डियों को बेचने के लिये उपयोग किया जाता है।जिसकी जानकारी किसी प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं है। क्योंकि वे ठेका देने के बाद इस ओर ध्यान तक नहीं देते।जबकि इस बारे में लगातार एक साल से जिले के आलाधिकारियों को शिकायतें तक हो रखी है। फिर भी इस ओर जिले के जिम्मेदार अधिकारी ध्यान तक नहीं दे रहे है।वहां मौजूद एक व्यक्ति ने अपना नाम न छापने की शर्तें पर बताया कि निगम में भ्रष्टाचार के चलते सभी चुप बैठे है। मजे की बात तो यह है कि भाजपा के एक नेता के परिवारजन भी इस घालमेल में शामिल है।

पहले प्रकाश में आ चुका है ऐसा मामला
बता दें कि आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू प्रसाद में एनिमल फैट मिलने का मामला प्रकाश में आ चुका है।जिसको लेकर बीकानेर में भी केन्द्रीय टीम आई थी और यहां जांच पड़ताल हुई थी।उसके बाद भी प्रशासन सतर्क नहीं हुआ और न ही स्वास्थ्य विभाग की नींद जागी। केन्द्रीय टीम की ओर से सरकार को पेश की गई रिपोर्ट में दावा किया गया कि तिरुपति मंदिर में श्रद्धालुओं को बांटने के लिए जो लड्डू तैयार किए जाते हैं,उनमें इस्तेमाल हुए घी में 3 जानवरों का फैट मिला है। लड्डू बनाने के लिए बेसन,देसी घी,काजू,किशमिश,इलायची और चीनी का इस्तेमाल होता है।लेकिन रिपोर्ट दावा करती है कि लड्डू में इस्तेमाल हुए घी में फॉरिन फैट भी मिला है। लड्डुओं के लिए इस्तेमाल हुए घी में भैंस की चर्बी,फिश ऑयल और सूअर की चर्बी की मिलावट पाई गई है।

निगम के कार्मिक भी इसमें शामिल
पता चला है कि इस मामले में निगम के कार्मिक भी शामिल है। जिन्हें मासिक बंदी मिलती है और वे मूक दर्शक बने बैठे है। जब इसकी शिकातय आती है तो वे खुदबुुर्द कर देते है। इतना ही नहीं इसको लेकर लगाई गई आरटीआई का जबाब भी नहीं दिया जाता है। ऐसे में निगम कार्मिकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।