तहलका न्यूज,बीकानेर। 45 वर्ष सुनीता,स्वास्थ्य के प्रति हमेशा सक्रिय और जागरूक रही थीं।लेकिन पिछले कुछ महीनों से उन्हें एक असहजता महसूस होने लगी—खासकर तैलीय या मसालेदार भोजन के बाद,पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन। शुरुआत में उन्होंने इसे नजरअंदाज किया। उन्होंने सोचा,“यह तो सिर्फ अपच है।”
लेकिन एक रात दर्द असहनीय हो गया।
शुरुआती संकेत
पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द शुरू हुआ और धीरे-धीरे पीठ और दाहिने कंधे तक फैल गया। यह तेज असहनीय दर्द था,जिसके साथ मतली भी हो रही थी। सुनीता याद करती हैं-“मैं बैठ भी नहीं पा रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे अंदर कुछ जकड़ रहा हो,”चिंतित परिवार उन्हें तुरंत इटर्नल हॉस्पिटल,जयपुर लेकर गया,जहां उन्होंने जीआई सर्जन डॉ.कपिलेश्वर विजय से परामर्श लिया। अल्ट्रासाउंड जांच में पता चला कि उन्हें पित्त की पथरी (गॉलब्लैडर स्टोन्स) हैं।
डॉक्टर ने समझाया:
“पित्त की पथरी (कोलेलिथियासिस) एक आम समस्या है,खासकर उत्तर भारत में,जहां यह लगभग 4–6% वयस्कों को प्रभावित करती है। ये पथरियां पित्त से बनने वाले ठोस कण होते हैं, जो अक्सर कोलेस्ट्रॉल से बनते हैं।”कुछ लोग इन पथरियों के साथ बिना किसी लक्षण के वर्षों तक रह सकते हैं, लेकिन सुनीता के मामले में ये समस्या पैदा करने लगी थीं।
जोखिम को समझना
जोखिम के कई कारक मौजूद थे:
– महिला होना
– 40 वर्ष से अधिक आयु
– थोड़ा अधिक वजन
– तैलीय भोजन का अधिक सेवन
डॉक्टर ने चेतावनी दी:
“यदि समय पर इलाज न किया जाए,तो पित्त की पथरी संक्रमण,मवाद बनने,पीलिया या अग्नाशयशोथ (पैंक्रियाटाइटिस) जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।”
इलाज का निर्णय
सबसे प्रभावी उपचार है—पित्ताशय को हटाना (कोलेसिस्टेक्टॉमी), जो परंपरागत रूप से लैप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा किया जाता है। यह एक सुरक्षित और व्यापक रूप से अपनाया गया तरीका है। लेकिन डॉक्टर ने एक और उन्नत विकल्प सुझाया:
रोबोटिक-सहायता प्राप्त कोलेसिस्टेक्टॉमी
थोड़ी घबराहट के साथ सुनीता ने पूछा, “रोबोटिक सर्जरी में क्या अलग है?”
डॉ. कपिलेश्वर ने समझाया:
– रोबोटिक आर्म्स के माध्यम से अधिक सटीकता, जो मानव कलाई से भी अधिक लचीलापन देती हैं
– 3D हाई-डेफिनिशन विज़न और बेहतर दृश्यता
– फ्लोरेसेंस जैसी उन्नत तकनीक से बाइल डक्ट की स्पष्ट पहचान
– छोटे चीरे, जिससे बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम और हर्निया का कम जोखिम
उन्होंने भरोसा दिलाया:
“सर्जरी डॉक्टर ही करते हैं, रोबोट केवल उनकी क्षमता को बढ़ाता है।”
सर्जरी और रिकवरी
सुनीता की रोबोटिक कोलेसिस्टेक्टॉमी दा विंची सर्जिकल सिस्टम की सहायता से की गई। सर्जरी सफल रही—कम दर्द, छोटे निशान और जल्दी छुट्टी।
“मैं उसी दिन चलने लगी और उम्मीद से कहीं जल्दी सामान्य जीवन में लौट आई,” वह मुस्कुराते हुए कहती हैं।
समय पर इलाज क्यों जरूरी है
हालांकि पित्ताशय का कैंसर सीधे तौर पर पित्त की पथरी से जुड़ा नहीं है,लेकिन नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) के शोध के अनुसार,उत्तर भारत जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में बिना लक्षण वाली पथरियों के लिए भी प्रोफिलैक्टिक कोलेसिस्टेक्टॉमी (पहले से पित्ताशय हटाना) पर विचार किया जा सकता है, ताकि कैंसर के खतरे को कम किया जा सके।
सुनीता का संदेश
“भोजन के बाद होने वाले पेट दर्द या असहजता को नजरअंदाज न करें। जो आपको सामान्य एसिडिटी लगता है, वह कुछ गंभीर भी हो सकता है।”
