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तहलका न्यूज,बीकानेर।शहर के जोड़बीड़ क्षेत्र में गाय की चर्बी बनने का विडियो वायरल होने के बाद भी जिला प्रशासन ने इसको लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहा है।जो कही न कही प्रशासन व स्वास्थ्य महकमा भी संदेह के घेरे में है।एक ओर तो सरकार शुद्ध के लिये युद्ध का अभियान चलाकर वाही-वाही बटोरने का काम करती है।वहीं दूसरी ओर जोड़बीड़ क्षेत्र में जानवरों की हड्डियों,खाल व अन्य अवशेष पदार्थों के मिलने तथा ड्रम में घी जैसा पदार्थ का विडिया सोशल मीडिया पर जारी होने के बाद भी किसी प्रकार की कार्रवाई न होना चिंता का विषय है।मजे की बात तो यह है कि स्वास्थ्य महकमें के अधिकारी भी मौन बैठे है।हालांकि जेएनवीसी थानाधिकारी देवेन्द्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर मौका मु आयना तो किया।लेकिन वहां पर विडियो में दिखाया जा रहे अवशेषों की पुष्टि नहीं की।इसको लेकर पुलिस ने गंभीरता से जांच पड़ताल नहीं की है।ऐसा परिवादी ने भी आरोप लगाया है।परिवादी जीव रक्षा दल के सदस्यों ने पुलिस व प्रशासन को सही और निष्पक्ष जांच पर सवालिया निशान उठाएं है।

देश में पहले भी हो चुकी है छापेमारी
मजे की बात तो यह है कि देश के यूपी,एमपी व हरियाणा में इस प्रकार की अवैध फैक्ट्रीयों पर कार्रवाई हो चुकी है।उसके बाद भी जिला प्रशासन की लापरवाही कही आमजन को भारी न पड़ जाएं।खबरें प्रकाशन के बाद से ही इस प्रकार का काम करने वाले गिरोह ने एकबारगी अपना सेटअप जोड़बीड़ से हटाकर जयपुर रोड़ पर शिफ्ट कर लिया है।जिसकी बीकानेर तहलका ने जानकारी देने के बाद भी प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के महकमें की टीम वहां नहीं पहुंची।इससे ऐसा प्रतीत होता है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम भी खानापूर्ति के लिये शुद्ध के लिये युद्ध का अभियान के तहत कार्रवाई करती आई है।इसको लेकर कभी भी सैम्पल फेल या पास की जानकारी तक मीडिया को उपलब्ध नहीं करवाती है।सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार शुद्ध के लिये युद्ध का अभियान से जुड़ी टीम अधिकांश छापेमारी की कार्यवाहियों में सेटलमेंट कर मामला रफा दफा कर देती है।

चुनाव अहम,अवैध कारोबार पर चुप्पी
बड़ी अजीब बात तो यह है कि जिला प्रशासन के लिये जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी इस खबर की पड़ताल से ज्यादा जरूरी पंचायत के चुनाव है।जिसके कारण वे इसके तह तक नहीं पहुंच पा रही।इस वजह से इस अवैध कारोबार में जुड़े लोगों को अनैतिक गतिविधियों पर पर्दा डालने का समय मिल गया। यदि पुलिस व जिला प्रशासन उसी दिन कार्रवाई करता तो निश्चित तौर पर ऐसे अवैध कारोबार का भंडाफोड़ हो सकता था। परन्तु ऐसा नहीं हुआ।