तहलका न्यूज,बीकानेर।सरकार आमजन को बेहतर स्वास्थ्य देने के कितने ही दावे कर लें।लेकिन उनके अपने ही कार्मिक सिस्टम के साथ ऐसा खिलवाड़ करते है।जिससे न तो राज्य सरकार की मंशा पूरी होती है और न ही आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया हो रही है।ऐसा ही एक मामला बीछवाल डिस्पेन्सरी का सामने आया है।जहां एक गर्मवती महिला हीना को सोनोग्राफी का टोकन इसलिए नहीं दिया गया।क्योकि उसके पास ममता कार्ड का मूल दस्तावेज नहीं था।जबकि उस प्रसूता ने डिस्पेन्सरी में उपस्थित डॉ गरिमा चौधरी ने साफ मना कर दिया कि उनका ममता कार्ड खो गया है। उसकी प्रतिलिपि है।उनके पति मनीष अरोड़ा ने डॉ चौधरी को आग्रह भी किया लेकिन नियमों की आड़ लेकर उसने सोनोग्राफी का टोकन देने से मना कर दिया। जबकि राज्य सरकार ने गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क सोनोग्राफी जांच के लिये सुविधा दे रखी है। हालांकि इसके लिये ममता कार्ड के मूल दस्तावेज की भी जरूरत नहीं है।बल्कि आधार कार्ड,जनआधार कार्ड और वैध मोबाइल नंबर जिस पर क्यू आर कोड आधारित ई वाउचर प्राप्त होता है,को ही जरूरी दस्तावेज के लिये मान्य किया गया है। उसके बाद भी बीछवाल स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी डॉ गरिमा ने हठधर्मिता दिखाते हुए टोकन देने की मनाही कर दी।जब इसकी शिकायत लेकर गर्भवती हीना के पति मनीष अरोडा सीएमएचओ से मिलने गये। तो वे जोधपुर थे।इस पर उन्होंने फोन पर संपर्क कर अपनी पीड़ा सीएमएचओ को बताई तो उन्होंने डॉ गरिमा से बात कर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए साथ ही एक प्रार्थना पत्र लिखकर देने को भी पीडि़ता को कहा। प्रसूता पति का आरोप है कि जब सरकार ने इस प्रकार का प्रावधान कर रखा है।तो फिर जबरन सीएमएचओ व बीछवाल स्वास्थ्य प्रभारी उनसे प्रार्थना पत्र क्यों मांग रहे है।अगर आज टोकन की तारीख निकल जाती है तो उन्हें फिर 15 दिन का इंतजार करना पड़ेगा।

क्या कहता है नियम
राजस्थान की मां बाउचर योजना के तहत निजी केन्द्रों पर मुफ्त सोनाग्राफी की सुविधा गर्मवती महिलाओं के लिये शुरू कर रखी है।इसमें मूल दस्तावेज आधार कार्ड,जनआधार कार्ड और वैध मोबाइल नंबर जिस पर क्यू आर कोड आधारित ई वाउचर प्राप्त होता है,होने चाहिए। हालांकि कि सी का ममता कार्ड बनवा रखा है तो उसकी प्रतिलिपि दी जा सकती है। महिला अगर कम से कम 84 दिन की गर्भवती हो तो ऐसी स्थिति में ममता कार्ड की अनिवार्यता नहीं है।

डॉ चौधरी पर द्धेषता से काम करने का आरोप
प्रसूता के पति मनीष का आरोप है कि डॉ चौधरी उनके साथ द्धेषतापूर्ण व्यवहार रखती है।जब उनकी कार्य के प्रति लापरवाही के अनेक मामले आएं तो इसको लेकर मोहल्लेवासियों ने चिकित्सा मंत्री व स्थानीय चिकित्सा अधिकारियों को इसकी शिकायत की थी।जिसके बाद उनका स्थानान्तरण भी गंगाशहर अस्पताल कर दिया गया। उसके बाद से वे स्थानीय मरीजों से अच्छा व्यवहार नहीं करती और अपने मूल स्थान पर पदस्थापन के विपरित यहां बैठी है।