तहलका न्यूज,बीकानेर। प्रयोगशाला सहायक भर्ती-2018 में हुए कथित फर्जीवाड़े के विरुद्ध बीकानेर संभाग के चार प्रमुख जिलों बीकानेर,चूरू,गंगानगर और हनुमानगढ़ के वैध और योग्य कार्मिक अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। इन जिलों के सैकड़ों ईमानदार कर्मचारियों ने अपने अनुभव प्रमाण-पत्र साझा कर एक मंच पर एकजुट होकर उन फर्जी कार्मिकों को सेवा से बाहर करने का बीड़ा उठाया है,जो गलत तरीके से सरकारी नौकरी हथियाकर बैठे हैं।
बाबूशाही और अधिकारियों की मिलीभगत या घोर लापरवाही?
इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मुख्यमंत्री नि: शुल्क जाँच योजना के कार्मिक संघ,बीकानेर के जिलाध्यक्ष किशन गोपाल छंगाणी ने आरोप लगाया है कि संभाग के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ अधिकारियों और बाबूओं ने फाइलों का सत्यापन करते समय अपनी “आंखें बंद” कर रखी थीं। प्रमाण-पत्रों पर संयुक्त निदेशक, बीकानेर जोन के हस्ताक्षरों में आई व्यापक भिन्नता और संदेह इस बात का प्रमाण है कि बिना किसी बारीकी से जांच किए इन्हें फर्जी तरीके से प्रमाणित किया गया।
फोरेंसिक जांच और निष्कासन की मांग
संभाग के वैध कार्मिकों ने न्यूज़ मीडिया के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी है कि वे इस भ्रष्टाचार को अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच: अनुभव प्रमाण-पत्रों पर किए गए हस्ताक्षरों की निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच करवाई जाए,ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ये हस्ताक्षर असली हैं या जाली।
फर्जी कार्मिकों को खदेडऩा: जांच प्रक्रिया पूरी होने तक उन सभी कार्मिकों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए जिनके प्रमाण-पत्रों में विसंगतियां पाई गई हैं।
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: जिन अधिकारियों और बाबूओं ने बिना जांच किए इन प्रमाण-पत्रों को सत्यापित किया,उनके खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाए।
बीकानेर संभाग के इन जिलों के हजारों परिवारों की मेहनत और ईमानदारी पर यह फर्जीवाड़ा एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।अब देखना यह है कि प्रशासन इस “भ्रष्टाचार के खेल” पर क्या कदम उठाता है,या फिर यह मामला भी फाइलों की धूल में दबा दिया जाएगा।
