तहलका न्यूज,बीकानेर।एक ओर जहां ग्रीष्म कालीन शिविरों के जरिये बच्चे संगीत,लेखन कला,नृत्य सहित अन्य आधुनिक मनोरंजन के साधनों की विधा सीख रहे है।वहीं गायत्री वेद पाठशाला सनातन संस्कृति को जीवित रखने के उद्देश्य से वैदिक प्रशिक्षण का आयोजन कर रही है।शिविर के पांचवे दिन पं बलदेव,पं.महेश ने गोपाल सहस्रनाम गणेशाम्बिका रूद्री का पठन करवाया। पं गण्ेशा और पं सूर्यनारायण ने पठनार्थ पुस्तकें व लेखनी वितरित की। इस मौके पर पं गौरीशंकर ने कहा की अपने गुरू का आदर करने से विद्या जल्दी प्राप्त होती है।मन लगाकर गुरू द्रारा बताये मंत्रों को ह्रदयस्थ क रे।उन्होंने कहा कि इससे न केवल उनका उच्चारण शुद्ध होता है,बल्कि उनमें भारतीय संस्कारों और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार भी होता है।आज के सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों सहित लुप्त हो रही संस्कृति को जीवित रखने के लिए संस्कारों को जीवित रखना जरूरी है।रुद्राष्ट्राध्याय के तहत रुद्रीपाठ का वाचन के साथ पुरूसुक्त, रूद्रसुक्त,श्रीसुक्त,नवग्रह मंत्र,शांति पाठ,भद्रसूक्त,गणपति स्मरण के साथ गणपति ध्यान के मंत्र का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही बच्चों को इसके फायदे भी समझाए जाते हैं।पाठ का वाचन करने के साथ ही हाथों के इशारे सिखाए जा रहे हैं।