तहलका न्यूज,बीकानेर।बीकानेर पूर्व राजपरिवार विवाद के मामले में आज कोर्ट ने आदेश जारी किया है। जिले के चर्चित राजमाता बाघेली जी सुदर्शना कुमारी ट्रस्ट विवाद में जिला न्यायाधीश अश्वनी विज ने आदेश जारी करते हुए प्रार्थीनी राज्यश्री कुमारी को ट्रस्ट से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्राप्त करने के लिए ट्रस्ट कार्यालय में प्रवेश की अनुमति दे दी है।तथा इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि यदि दस्तावेज लेने के दौरान किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न की जाती है तो तत्काल पुलिस सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाए। इस मामले में राज्यश्री कुमारी की ओर से अधिवक्ता कमलनारायण पुरोहित उपस्थित हुए,जबकि प्रतिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार सुथार और राज्य सरकार की ओर से राजकीय अभिभाषक राधेश्याम सेवग ने रखा।मामले के अनुसार प्रार्थीनी राज्यश्री कुमारी ने 27 अक्टूबर 2025 को कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र पेश कर कहा था कि राजमाता बाघेली जी सुदर्शना कुमारी ट्रस्ट से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज वर्तमान में प्रतिवादी पक्ष के कब्जे में हैं।इन दस्तावेजों के बिना ट्रस्ट की आयकर विवरणियां दाखिल नहीं हो पा रही हैं और आयकर विभाग द्वारा लगाई गई डिमांड राशि के मामलों में समुचित जवाब भी नहीं दिया जा पा रहा।।प्रार्थना पत्र में जिन दस्तावेजों की मांग की गई उनमें वर्ष 2014 से 2023 तक की कैश बुक,लेजर,बैंक बुक,वाउचर फाइलें,बैंक स्टेटमेंट,ट्रस्ट की मूल ट्रस्ट डीड,एफडीआर,जमीनों के रिकॉर्ड,पट्टे,ट्रस्ट का मूल पंजीयन प्रमाण पत्र और ओरिजिनल मिनट बुक शामिल हैं।राज्यश्री कुमारी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सहायक आयुक्त देवस्थान विभाग,बीकानेर ने भी पहले प्रतिवादी पक्ष को ये दस्तावेज उपलब्ध करवाने के आदेश दिए थे,लेकिन इसके बावजूद रिकॉर्ड नहीं सौंपा गया।राज्यश्री कुमारी पक्ष ने दलील दी कि दस्तावेज नहीं मिलने कारण कई वर्षों से ट्रस्ट के आयकर रिटर्न दाखिल नहीं पाए हैं और अब आयकर विभाग दंडात्मक कार्रवाई में आगे बढ़ चुका है।प्रतिवादी पक्ष ने प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि दस्तावेज किस प्रतिवादी से मांगे जा रहे हैं।यह भी तर्क दिया गया कि ट्रस्ट के अधिकांश रिकॉर्ड दिवंगत ठाकुर हनुवंत सिंह के पास रहते थे और उनकी मृत्यु के बाद रिकॉर्ड की वर्तमान स्थिति की जानकारी नहीं है।इसे प्रतिवादी पक्ष ने प्रार्थना पत्र को अनावश्यक विवाद बढ़ाने और मामले को लंबा खींचने का प्रयास बताया।कोर्ट ने रिकॉर्ड और दस्तावेजों का परीक्षण करने के माना कि राजमाता बाघेली जी सुदर्शना कुमारी ट्रस्ट पंजीबद्ध सार्वजनिक न्यास है और राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास अधिनियम,1959 के तहत ट्रस्ट को हर वर्ष ख का ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है।कोर्ट ने आदेश में उल्लेख किया कि वर्ष 2013-14 के बाद ट्रस्ट के खातों का ऑडिट नहीं कराया गया और न ही आयकर संबंधी विवरणियां दाखिल की गईं,जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होने की आशंका है।कोर्ट ने यह भी माना कि दस्तावेज उपलब्ध करवाने से किसी भी पक्ष को नुकसान नहीं होगा,जबकि रिकॉर्ड नहीं देने से ट्रस्ट और राजस्व दोनों प्रभावित हो सकते है।कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्यश्री कुमारी कार्यालय समय में ट्रस्ट परिसर में जाकर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर सकती हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें संबंधित थानाधिकारी को पहने से सूचना देनी होगी। पुलिस अधीक्षक बीकानेर और बीछवाल थाना प्रभारी को निर्देश दिए गए हैं कि यदि प्रतिवादी पक्ष किसी प्रकार की दखलअंदाजी करता है तो पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाए और पूरी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए।
