तहलका न्यूज,बीकानेर।आमतौर पर बिजली की खपत से ज्यादा बिल आता है तो उपभोक्ता इसके समाधान के लिये बिजली अभियंता से मिलता है।लेकिन उसके समाधान करने की बजाय उसे मीटर ही बदलवाने की राय दी जा रही है। ऐसा ही बीकानेर में देखने को मिल रहा है।जहां बिजली की निजी कंपनी द्वारा किया जा रहा है।यहां के उपभोक्ताओं को शिकायत करने पर इस प्रकार का जबाब सुनने को मिल रहा है।हालात यह है कि कई उपभोक्ताओं के बिजली की खपत कम होने के बाद भी बिल दो से ढाई हजार रूपये आ रहा है।सरकार ने 100 यूनिट बिजली माफ कर रखी है।ऐसे में इस तरह के उपभोक्ताओं के बिजली का बिल दो से ढाई हजार रूपये आना बिजली कंपनी का संदेह के घेरे में लाती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है,जिसमें महज 74 यूनिट का बिल 2427 रूपये आया है।जबकि डिमांड चार्ज,फ्यूज चार्ज,इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी चार्ज और अन्य चार्ज के साथ बिजली उत्पादन चार्ज की राशि मिला ली जाएं तो 624 रूपये के करीब बिजली का बिल बनता है।अब यहां सवाल उठता है कि आखिर बिल भेजने के मापदंड क्या है।जिसके चलते बिजली की निजी कंपनी उपभोक्ताओं की जेब ढीली करने में लगी है।

पिछले एक साल के रिकार्ड में भी उच्चतम 89 यूनिट
मंजर यह है कि आचार्यों के चौक निवासी मुरली अग्रवाल के पिछले एक साल के बिजली बिल के यूनिट की बात करें तो पिछले अगस्त में उच्चतम यूनिट 89 आएं हुए है।इसके अलावा कंपनी भी साल का औसतन यूनिट 50 मान रही है। उसके उपरान्त भी 74 यूनिट का बिजली बिल 2400 से ज्यादा आना कंपनी की नियती पर सवाल खड़े करती है।जब इस प्रकरण को लेकर अग्रवाल रामपुरिया मोहल्ले स्थित कंपनी कार्यालय पहुंचे तो वहां मौजूद अभियंता ने बिजली का मीटर की बदलवाने की सलाह दे डाली। जबकि मीटर के साथ अग्रवाल परिवार ने किसी प्रकार की छेडखानी नहीं कर रखी है।बीकानेर तहलका संवाददाता ने पीडि़त परिवार से बात की तो सामने आया कि उनके घर में बिजली की खपत अधिक नहीं होती है। सरकार की ओर से 100 यूनिट बिजली फ्री की योजना भी उन्हें मिल रही है।उसके बाद भी यूनिट कम आने पर बिल ज्यादा आना परेशानी का सबब है।जब इसको लेकर अधिकारियों से मिलते है तो वे केवल एक ही रट लगाते है कि अपने घर का मीटर बदला लो,नहीं तो हम जबरन बदल देंगे।दिव्यांग मुरली अग्रवाल का कहना है कि अगर मीटर में किसी प्रकार की गड़बड़ी होती तो विगत बिलों में उजागर हो जाती।परन्तु ऐसा नहीं है,पिछले एक साल से ज्यादा की गणना में यूनिटों में ज्यादा बदलाव नहीं आ रहा है।उसके बाद भी सुनवाई नहीं हो रही और बिजली कंपनी उपभोक्ताओं को राहत देने का दावा कर रही है।