






तहलका न्यूज,बीकानेर।जिले में निकाय और पंचायतीराज चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज होने लगी हैं।महापौर व अध्यक्ष की लॉटरी निकलने के बाद चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों की नजर अब वार्ड आरक्षण की लॉटरी पर टिक गई है।शहरी निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण रहेगा,जबकि पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।इसके साथ ही एससी,एसटी और ओबीसी वर्गों के लिए निर्धारित आरक्षण के आधार पर भी सीटों का वर्गीकरण किया जाएगा।आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही कई मौजूदा दावेदारों की उम्मीदों पर असर पड़ेगा। वहीं नए चेहरों के लिए चुनावी मैदान में उतरने के रास्ते खुलेंगे।
लॉटरी तय करेगी किस वार्ड में किसे मौका
सियासी जानकारों का कहना है,वार्ड आरक्षण लॉटरी सिर्फ सीटों का वर्गीकरण नहीं,बल्कि आने वाले चुनावों की सियासी समीकरण तय करने वाला बड़ा पड़ाव साबित होगी।किस वार्ड में महिला प्रत्याशी मैदान में उतरेंगी,कौन-सा वार्ड एससी,एसटी या ओबीसी के लिए आरक्षित होगा और कौनसी सीट सामान्य रहेगी,यह लॉटरी के बाद ही स्पष्ट होगा।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है,कई संभावित प्रत्याशी लंबे समय से अपने वार्ड में चुनावी तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में यदि उनका वार्ड आरक्षित हो जाता है तो उन्हें दूसरे वार्ड की तलाश करनी पड़ सकती है।वहीं आरक्षित सीटों पर नए दावेदारों को मौका मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
आरक्षण लॉटरी खुलते ही शुरू होगी असली दौड़
राजनीतिक विश्लेषक मानते है कि वार्ड आरक्षण लॉटरी खुलने के बाद ही राजनीतिक दलों के लिए भी टिकट वितरण की कवायद तेज होगी।सामान्य सीटों पर पुराने दावेदारों के साथ नए चेहरे उतरेंगे,जबकि महिला और आरक्षित सीटों पर राजनीतिक दलों को नए सामाजिक समीकरण साधने होंगे।यही वजह है कि वार्ड आरक्षण की लॉटरी को निकाय और पंचायत चुनावों की पहली बड़ी सियासी परीक्षा माना जा रहा है।लॉटरी के परिणाम सामने आते ही यह तय होना शुरू हो जाएगा कि किस वार्ड में कौन दावेदार मजबूत है और किसे अपना चुनावी क्षेत्र बदलना पड़ेगा।
किस पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा
सबसे पहले असर उन संभावित उम्मीदवारों पर पड़ेगा जो वार्ड आरक्षण के आधार पर अपनी चुनावी तैयारी तय करते हैं।जैसे ही लॉटरी निक लेगी,कई वार्डों की राजनीतिक तस्वीर बदल जाएगी।कुछ दावेदारों के लिए रास्ते खुलेंगे,तो कुछ को नए विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।दूसरा बड़ा असर राजनीतिक दलों पर होगा।उन्हें टिकट वितरण,स्थानीय गठजोड़,जातिय-सामाजिक समीकरण और बूथ स्तर की रणनीति को तेजी से अंतिम रूप देना पड़ेगा।तीसरा असर प्रशासनिक मशीनरी पर दिखेगा,जिसे सीमित समय में आरक्षण,अधिसूचना और चुनावी प्रबंधन की कई परतें एक साथ संभालनी होंगी।
महापौर को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू
उधर महापौर की लॉटरी अनारक्षित निकलने के बाद सोशल मीडिया पर महापौर पद के लिये नामों पर चर्चाएं शुरू हो गई है।जहां भाजपा की ओर से पूर्व महापौर नारायण चोपड़ा,महावीर रांका,मोहन सुराणा,शिवकुमार रंगा,मोतीलाल हर्ष,एड अशोक प्रजापत,रविशेखर मेघवाल,चंपालाल गेधर जैसे सरीखे नेताओं की चर्चा सोशल मीडिया पर की जा रही है।तो वहीं कांग्रेस की ओर से हजारी देवड़ा,मकसूद अहमद,बल्लभ कोचर,कमल कल्ला,दिलीप बांठिया आदि के नामों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।लेकिन जब तक वार्डों की लॉटरी को लेकर तश्वीर साफ नहीं होगी तब तक वरिष्ठ नेता चुप्पी साधे बैठे है। कोई भी खुलकर अभी चुनाव लडऩे के मानस को लेकर बात नहीं कर रहे है।
