तहलका न्यूज,बीकानेर। नवरात्री के खास मौके पर गणगौर के दौरान माँ पार्वती की एक ऐसी प्रतिमा है,जिसे विशेष सुरक्षा पहरे के बीच रखा जाता है. ऐसा क्यों चलिए आपको बताते हैं।गणगौर के दौरान माँ पार्वती की एक ऐसी प्रतिमा है,जिसे खास सुरक्षा के बीच रखा गया है।क्योंकि माँ के श्रृंगार में ऐसे अनमोल गहने है, जिनकी कीमत करोड़ों में है। जहां महज नवरात्र के दौरान महज दो दिन के लिए इस प्रतिमा को खुले चौक में पंडाल में लोगों के विशेष दर्शन के लिए रखा जाता है। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।नवरात्र के दिनों में होने वाले गणगौर पर्व के दौरान यहाँ की सैकड़ों साल पुरानी माँ गणगौर,जिन्हें माँ पार्वती का रूप कहा जाता है उनकी अनमोल प्रतिमा पर हीरे जेवरात,कुंदन और सोने के आभूषण पहनाए गए हैं। जिनकी कीमत करोडों में है।इस प्रतिमा की सुरक्षा के लिहाज से विशेष सुरक्षा दी जाती है। इस प्रतिमा की विशेषता ये है की ये 150 से अधिक साल पुरानी है। तीज और चौथ के दिन महिलाएं पुत्रप्राप्तिके लिए माँ गणगौर के आगे नृत्य करती है। इनके दर्शन भी साल में एक ही बार होते है। पौराणिक कहानियों के मुताबिक 150 से अधिक साल पहले की बात है की उदयमल के कोई पुत्र नहीं था उन दिनों माँ गौरी की पूजा सिर्फ राजा ही किया करते थे। उन्होंने राजा के घर जा कर माँ गणगौर (पार्वती) की पूजा की।ठीक एक साल बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्रप्ति हुई,पुत्र का नाम चांदमल रखा गया। बाद में जिस गणगौर की पूजा की गयी उसका नाम चांदमल की गणगौर रखा गया। उसके बाद यह परम्परा शुरू हुई,जो लगभग पिछले 150 से अधिक साल से चली आ रही है. इस अवसर पर मेला लगता है,महिलाएं पुत्र प्राप्ति के लिए नृत्य करती है और मन्नत मांगती है। माँ गणगौर का यह दरबार साल में सिर्फ दो दिन ही लगता है।इस पुण्य पर्व पर हर कोई मंगलकामना के लिए माँ के दर्शन को आता है।देश विदेश से लोग इस दिन के लिए इकठ्ठा होते है। इस गणगौर की विशेषता ये है की इस गणगौर के पाँव है ये अपने आप में माँ गणगौर की एक मात्र अनोखी प्रतिमा है जिसमे पाँव बने है।माँ पूजा अर्चना में जिन लोगों की मन्नत पूरी होती है।वो महिलाएं माँ को चुनरी ओढाती हैं और माँ के चरणों में नारियल और बताशे का प्रसाद चढ़ाते है। वहीं जिनकी मन्नत माँ पूरी करती है वे अपने बच्चो को धोक दिलवाने लाते है और अपने पुत्र और पुत्री की दीर्घायु की कामना करते है।