तहलका न्यूज,बीकानेर।एक ओर तो कांग्रेस निकाय व पंचायत चुनावों को लेकर राज्य सरकार को आड़े हाथों ले रही है।वहीं दूसरी ओर अभी तक बीकानेर में शहर व देहात की कार्यकारिणी भी नहीं बन पाई है।जिसके चलते दोनों अध्यक्ष एकला चलो के तर्ज पर कार्य कर रहे है।हालात यह है कि पार्टी विपक्ष की भूमिका भी सही ढंग से निभा नहीं पा रही है।हालात यह है कि कभी वरिष्ठ नेता,पूर्व मंत्री व पूर्व जिलाध्यक्ष अपनी अपनी ढफली अपने अपने राग को तरजीह देते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे है तो कभी जिलाध्यक्ष चंद लोगों के साथ जनसमस्याओं के निस्तारण के केवल ज्ञापन सौंपते दिख रहे है।मंजर यह है कि संगठनात्क ढांचा कमजोर होने के कारण कांग्रेस के साथ आमजन का जुड़ाव तक नहीं हो रहा है। स्थिति इतनी विकट हो चली है कि 6 महीने बीत जाने के बाद भी कांग्रेस के शहर व देहात कार्यकारिणी घोषित नहीं हो पाई।
नियम आ रहे आड़े
कांग्रेस के एक नेता से जब हमारे संवाददाता ने बात की तो उसने संगठन सृजन अभियान और पार्टी की ओर से जारी नई गाइडलाइन्स का हवाला दिया।उन्होंने कहा कि राजस्थान कांग्रेस द्वारा जारी नए संगठन सृजन अभियान’ और गाइडलाइन्स के तहत,संगठन में गुटबाजी और जंबो कार्यकारिणी को रोकने के लिए सख्ती की गई है।इसके अंतर्गत शहर कार्यकारिणी में अधिकतम 31 और देहात (ग्रामीण) कार्यकारिणी में केवल 51 पदाधिकारी ही नियुक्त किए जाने का नियम निर्धारित है। वहीं नये जिलाध्यक्षों के 6 माह तक कार्य समीक्षा करने की बात भी सामने आई है।बता दें कि शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल और देहात अध्यक्ष बिसनाराम सियाग की नियुक्ति 21 नवम्बर 2025 को हुई थी। उस हिसाब से 6 माह से अधिक का समय बीत चुका है।
नाम प्रदेशाध्यक्ष को भेजे,घोषणा बाकी
उधर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्ते पर बताया कि दोनों जिलाध्यक्षों की ओर से अपनी नई टीम के नाम प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द डोटासरा को भेज दिए है। लेकिन अब तक उन नामों पर क्यों सहमति नहीं बनी। ये शीर्षस्थ नेता ही बता पाएंगे। इस वरिष्ठ नेता ने यह भी बताया कि संगठन को धार देने के लिये राजस्थान कांग्रेस गांवों और शहरों में 25 हजार कार्यकारिणियां बनाएगी। इनमें 14000 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में अध्यक्ष और कार्यकारिणी बनाई जाएगी। इसी तरह से शहरी इलाकों में नगर निकायों के 11000 से अधिक वार्डों में वार्ड अध्यक्ष और कार्यकारिणी का गठन होगा। कांग्रेस इनके जरिये अपने संगठन को मजबूती देगी। किन्तु अब तक न तो 25 हजार कार्यकारिणयां बनी है और निकाय के वार्ड अध्यक्ष। ऐसे में कांग्रेस आने वाले निकाय चुनावों में किस तरह सताधारी पार्टी का मुकाबला करेगी।
