तहलका न्यूज,बीकानेर।दान-पुण्य और व्रत-उपासना के पर्व निर्जला एकादशी कल मनाई जाएगी।घरों में एकादशी को लेकर जहां आलू,साबुदाना,केला आदि से सामग्री तैयार की जा रही है,वहीं बाजारों में दान-पुण्य के लिए विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की खरीदारी शुरू हो गई है।निर्जला एकादशी पर बहन-बेटियों के ससुराल भेजे जाने वाले फलियार की तैयारियां भी की जा रही है।इस पर्व पर आम और ओला भेजने की भी परम्परा है।निर्जला एकादशी से कुछ दिन पहले से ही आम-ओला और फलियार भेजने का क्रम शुरू हो जाता है।फलियार में कई तरह की मिठाईयां भी भेजी जाती है।दान-पुण्य के लिए पानी की मटकिया,पंखी,ओला,सेवईया,शर्बत आदि की दुकानें सजने के साथ इनकी बिक्री शुरू हो गई है।व्रत-उपवास के साथ इस दिन दान-पुण्य होगा।

तैयार हो रही खाद्य सामग्री
निर्जला एकादशी को लेकर घरों सहित कारखानों में विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्रीतैयार हो रही है।कारखानों में निर्जला एकादशी के लिए चीनी से बने ओला,ठंडाई ओला,सेवईया तथा विभिन्न प्रकार के शर्बत तैयार हो रहे है।वहीं घरों में भी आलू,साबुदाना और केला से चिप्स बनाए जा रहे है।कई घरों में दान-पुण्य के लिए विभिन्न प्रकार के शर्बत भी तैयार किए जा रहे है।

शुरू हुई खरीदारी
निर्जला एकादशी पर दान-पुण्य के विशेष महत्व के कारण खरीदार शुरू हो गई है। पंखे,कूलर,एसी,फ्रीज,मटकिया आदि की खरीदारी की जा रही है।किराणा की दुकानों पर एकादशी के दिन के लिए विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री की खरीदारी चल रही है।गुलाब,केसर,चंदन,बेला आदि विभिन्न प्रकार के शर्बत की बोतलों की खरीदारी भी की जा रही है। निर्जला एकादशी पर घरो में उपयोग करने के साथ इनका दान पुण्य भी किया जाएगा।

दिन भर चलेगा दान पुण्य का दौर
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व है, लेकिन इन सबमें निर्जला एकादशी को सबसे सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस व्रत में अन्न के साथ- साथ जल का भी त्याग कर भगवान विष्णु की भक्ति की जाती है।कल इस पावन मौके पर शहर के लक्ष्मीनाथ मंदिर सहित सभी प्रमुख मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे।सुबह से ही मंदिरों में भीड़़ जुटेगी और दिन भर दान पुण्य के दौर चलेंगे। जगह जगह ठंडी पेयजल के शिविर लगाएं जाएंगे।श्रद्धालु इस दिन भगवान को जल से भरा मिट्टी का कलश,पंखा,चीनी और मौसमी फल जैसे खरबूजा,तरबूज और आम अर्पित क रेंगे। निर्जला एकादशी 24 जून को शाम 6.14 बजे से लगेगी जो 25 जून को रात 8.10 बजे तक रहेगी।इस बार भगवान विष्णु की आराधना के लिए चार विशेष योगों का रवि,शिव और सिद्ध योग के साथ ही गुरुवार का संयोग भी बन रहा है।एकादशी का व्रत रखने से सुख-समृद्धि की प्राप्त होती है। पितृ भी प्रसन्न होते हैं।वेद व्यास के अनुसार अगर साल की 24 एकादशी न की जा सके तो केवल निर्जला एकादशी व्रत करने से ही पूरा फल प्राप्त हो जाता है।इस एकादशी के व्रत से समस्त तीर्थ का पुण्य,सभी एकादशियों का फल व सब दान का फल मिलता है।

भीम ने भी रखा था यह व्रत, इसलिए कहते हैं पांडव एकादशी
पौराणिक कथाओं के अनुसार,महाभारत काल में महर्षि वेदव्यास के कहने पर महाबली भीम ने इस कठिन उपवास को रखा था।भीमसेन अपनी तेज भूख के कारण साल की सभी एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे,तब उन्हें इस एक एकादशी को रखने की सलाह दी गई थी।इसी वजह से इसे ‘पांडव एकादशी’ या ‘भीमसेनी एकादशी’ भी कहा जाता है।मान्यता है कि मात्र इस एक व्रत को पूरी निष्ठा से रखने पर साल भर की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य मिल जाता है।इस दिन पानी,अनाज,कपड़े और छाते का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।