तहलका न्यूज,बीकानेर। सरकारी महकमों को पेपरलेस करने के उद्देश्य से डिजिटल क्रांति की शुरूआत हुई थी।लेकिन इस डिजिटल व्यवस्था को सरकारी कार्मिकों और अधिकारियों ने सरकार को गुमराह करने का हथियार बना लिया है। जिसके चलते सरकारी पोर्टल पर भी झूठ का खेल चला रखा है।बात कर रहे है स्वास्थ्य विभाग की। जहां अपने ही कार्मिक की मौत की सूचना को पोर्टल पर झूठा चला दिया गया।जबकि महकमें की ओर से उसकी शोकसभा कर उसके संवेदना का एक पत्र भी जारी किया गया था। बताया जा रहा है कि संपर्क पोर्टल पर मृतक की पत्नी ने शिकायत दर्ज करवाते हुए बताया है कि रामनिवास प्रयोगशाला भर्ती 2018 में चयनित हो गया था। जिसे 2021 में पूगल में नियुक्ति दे दी गई थी। लेकिन नवम्बर 2022 में वरियता सूची में परिवर्तन के चलते यह सूची से बाहर हो गया। था।इसके बाद भी वह संविदा पर लगा रहा था। इस दौरान पूगल में लैब भी चला रखी थी। जिसको लेकर डॉ सी एस मोदी व डबल एओ इकरार को यह बात खलती नहीं थी और इसे लगातार तंग करने करते रहे तथा अंत में नौकरी से हटा दिया।मृतक की पत्नी ने पोर्टल पर की शिकायत में इस बात का भी जिक्र किया है कि दिसम्बर 22 में मेरे पति ने हाईकोर्ट में वाद दायर कर रखा है। जिसकी कॉपी मेरे पति जब सीएमएचओ डॉ पुखराज साध को देने गये तो उन्होंने संयुक्त निदेशक डॉ देवेन्द्र चौधरी का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने तुम्हें बैक डोर एंट्री दी है। उनसे बात करो। मेरे पति जनवरी 2025 में डॉ चौधरी से भी मुलाकात की।परन्तु उन्होंने कुर्सी का पावर है कहकर बात नहीं सुनी। आखिकार तनाव मे आकर मेरे पति रामनिवास ने 2 नवम्बर 25 को नहर में कूदकर अपनी जान दे दी थी।
डिजिटल सबूत दे रहे कुछ ओर ही गवाही
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और अकाट्य डिजिटल सबूत सामने आया है,जिसने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की नीयत और संवेदनहीनता के परखच्चे उड़ा कर रख दिए हैं।अब तक अधिकारी इस मामले में अनजान बनने या केवल तकनीकी खामी का बहाना बनाने की कोशिश कर रहे थे,लेकिन इस ईमेल के स्क्रीनशॉट ने साफ कर दिया है कि महकमे के ‘आकाओं’ को पल-पल की खबर थी।
क्या है इस ईमेल का पूरा विवरण?
सामने आए ईमेल के तकनीकी विवरण के अनुसार यह ईमेल डॉ.रामस्वरूप ज्याणी (प्रभारी,उप-जिला अस्पताल पूगल) की आधिकारिक सरकारी मेल chc-bik-pug-rj@gov.in से 23 मार्च 2026 को दोपहर 3:11 बजे भेजा गया था।ठीक उसी दिन जब अस्पताल में मृतक कर्मचारी की आत्मा की शांति के लिए आधिकारिक शोक-सभा की सूचना जारी की गई थी।यह मेल मुख्य रूप से chhanganikishan@gmail.com और chanchal9khatri@gmail.com को भेजा गया।
सीसी में बैठे थे महकमे के सबसे बड़े जिम्मेदार
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मेल की प्रति विभाग के उन शीर्ष अधिकारियों को मार्क की गई थी,जो सीधे इस मामले में कार्रवाई के लिए जिम्मेदार थे।डॉ.पुखराज साध (सीएमएचओ)- जिनकी आधिकारिक आईडी cmho-bik-rj@nic.in इस मेल के सीसी में मौजूद है।डॉ.देवेंद्र कुमार चौधरी (संयुक्त निदेशक)- जिनकी आधिकारिक आईडी jdmh-bik-rj@nic.in भी इस मेल की लूप में सीधे जोड़ी गई थी।इसके अलावा डॉ.एस.मोदी टीबी नियंत्रण नेटवर्क की आईडी dtorjbkn@rntcp.org को भी इसमें शामिल किया गया था।
तो क्या जानबूझकर दबाई गई सुसाइड की बात?
सीधे तौर पर संयुक्त निदेशक और सीएमएचओ कार्यालय को कटघरे में खड़ा करता है।23 मार्च 2026 को संयुक्त निदेशक देवेंद्र कुमार चौधरी और सीएमएचओ पुखराज साध की ईमेल आईडी पर आधिकारिक रूप से यह सूचना पहुंच जाती है कि उनके पूर्व कार्मिक रामनिवास ने आत्महत्या कर ली है।लेकिन इसके ठीक बाद,13 अप्रैल 2026 को संयुक्त निदेशक कार्यालय इसी शिकायत को यह कहकर बंद कर देता है कि संविदा समाप्त होने के कारण कर्मचारी की सेवाएं स्वत: समाप्त हो गई थीं।यह विरोधाभास साफ तौर पर बयां करता है कि इन बड़े अधिकारियों को ईमेल के जरिए मौत और प्रताडऩा के आरोपों की पूरी भनक थी।इसके बावजूद,पोर्टल पर की गई तथाकथित ‘एक्शन हिस्ट्री’ में इस खौफनाक सुसाइड और प्रताडऩा के आरोपों का दूर-दूर तक कोई जिक्र नहीं किया गया।
प्रशासनिक क्रूरता की पराकाष्ठा
बेबस विधवा के सुहाग उजडऩे की चीखें एक तरफ अधिकारियों के इनबॉक्स में ईमेल बनकर तैर रही थीं और दूसरी तरफ सरकारी फाइलों में इसे ‘नियमों के तहत हुआ निपटारा’ बताकर रफा-दफा किया जा रहा था। ईमेल का यह सबूत चीख-चीखकर कह रहा है कि यह केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं,बल्कि सच को दबाने और दोषियों को बचाने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा प्रतीत होती है।क्या इस डिजिटल सबूत के बाद भी इन रसूखदार कुर्सियों पर बैठे अफसरों के खिलाफ कोई कड़ा एक्शन लिया जाएगा?
