तहलका न्यूज,बीकानेर।नगर निगम चुनाव को लेकर काउंटडाउन शुरू हो गया। 31 अगस्त तक नामांकन करना है और इसमें दस दिन भी नहीं बचे हैं। तेजी से शुरू हुए काउंट डाउन में जहां एक ओर दोनों पार्टियां तेजी से काम करने लगी है,वहीं दावेदारों की पहुंच पार्टी दफ्तरों तक तेज हो गई।वहीं निर्दलिय भी मजबूत वार्डों की तलाश में जुट गए है।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निवर्तमान पार्षद मनोज विश्नोई के नेतृत्व में कुछ पूर्व पार्षदों की गुप्त मंत्रणा हुई है। जिन्होंने दोनों की पार्टियों के खिलाफ अपना दमखम दिखाने पर मंथन किया। बताया जा रहा है कि अपने वार्ड 35 में मजबूत स्थिति में दिखा दे रहे मनोज विश्नोई ने 31 वार्ड की नब्ज भी टटोलनी शुरू कर दी है।इसके अलावा भी उनके साथी निर्दलिय भी इस दफा पार्टियों की गणित बिगाडऩे का मानस बना चुके है। इसके अलावा निर्दलियों का यह तीसरा मोर्चा वार्ड 10,32,50 में भी अपने उम्मीदवार तैयार कर रहा है।

बागी और निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं खेल
अंदरखाने की बात है कि निकाय चुनाव में सबसे इस बार पार्टियों के सामने बड़ी चुनौती अपने कार्यकर्ता व नेता ही है।वार्डों के बदले समीकरण के बाद महापौर बनने की आस लगाएं बैठे भाजपा व कांग्रेस के अधिकांश नेता दूसरे वार्डों की तलाश में जुट चुके है और उन्होंने दूसरे वार्डों से आवेदन फॉर्म भी ले लिया है।ऐसा माना जा रहा है कि टिकट वितरण के बाद बागी उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं तो वे सीधे मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना सकते हैं।ऐसे में निर्दलियों के रूप में पूर्व पार्षदों का बना तीसरा मोर्चा खासतौर पर ऐसे वार्डों की तलाश कर रहा है,जहां जीत का अंतर पिछली दफा कम रहा।निवर्तमान पार्षद मनोज विश्नोई का मानना है कि वहां एक मजबूत बागी प्रत्याशी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार का गणित बिगाड़ सकता है।इसके अलावा कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी सीधे तौर पर चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता रखते हैं।

अलग-अलग होगी चुनावी रणनीति
इन पूर्व पार्षदों का मानना है कि मतदाताओं की संख्या में बड़ा अंतर प्रत्याशियों की चुनावी रणनीति को भी पूरी तरह बदल देगा।बड़े वार्डों में जनसभाएं,नुक्कड़ सभाएं,बूथ प्रबंधन और कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क सफलता की कुंजी होगा।वहीं छोटे वार्डों में व्यक्तिगत संपर्क,परिवार स्तर पर संवाद और स्थानीय मुद्दों पर फोकस ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है।