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अनिल कल्ला बने बीकानेर के नये महापौर, क्रॉस वोटिंग बना चर्चा का विषय

भाजपा प्रत्याशी को 20 वोटों से दी मात तहलका न्यूज,बीकानेर। महापौर चुनाव को लेकर सोमवार

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अनिल कल्ला बने बीकानेर के नये महापौर, क्रॉस वोटिंग बना चर्चा का विषय

भाजपा प्रत्याशी को 20 वोटों से दी मात
तहलका न्यूज,बीकानेर। महापौर चुनाव को लेकर सोमवार को हुए चुनाव में कांग्रेस के अनिल कल्ला ने जीत दर्ज कर ली है।उन्हें 50 वोट हासिल हुए।जबकि भाजपा प्रत्याशी सुरेन्द्र सिंह शेखावत को महज 30 वोट मिले।उनके जीत के साथ ही समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।इससे पहले बीकानेर नगर निगम सभागार में मतदान प्रक्रिया शुरू हो गयी है।मतदान शुरू होने के साथ ही सबसे पहले भाजपा प्रत्याशी सुरेन्द्र सिंह शेखावत मतदान करने निगम पहुंचे। इसके बाद कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कल्ला ने मतदान किया। मतदान प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस के प्रभारी,जिलाध्यक्ष,पूर्व जिलाध्यक्ष यशपाल गहलोत,देहात अध्यक्ष बिसनाराम सियाग आदि ने मोर्चा संभाले रखा। महापौर के चुनाव के लिए सुबह 10 बजे से मतदान प्रक्रिया शुरू हुई जो दोपहर 2 बजे तक नगर निगम सभागार में चली।महापौर का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होने से चुनाव मैदान में बीकानेर पूर्व और बीकानेर पश्चिम से चुने गये पार्षद प्रत्याशी खड़े हुए है।रिटर्निंग अधिकारी रीना के नेतृत्व में सोमवार को आरओ सेल में नियुक्त अधिकारी एवं कर्मचारी चुनाव तैयारियों में जुटे रहे। वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर)चक्रवर्ती सिंह,आरपीएस आकांक्षा गोदारा,सीओ सिटी अनुज डाल,मुक्ता प्रसाद थानाधिकारी विश्वजीत सिंह,सदर थानाधिकारी राजेश कुमार,बीछवाल थानाधिकारी दिगपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में पुलिस जाब्ता ने नगर निगम पहुंचकर चुनाव और मतगणना की तैयारियों सहित अन्य व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला,शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल,देहात अध्यक्ष बिसनाराम सियाग,शिवलाल गोदारा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस व भाजपा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। वहीं भाजपा के विधायक जेठानंद व्यास,भाजपा प्रभारी महावीर सैनी,मोहन सुराणा,अशोक प्रजापत,अध्यक्ष सुमन छाजेड़,अशोक भाटी आदि की उपस्थिति रही।

बसों में आएं भाजपा-कांग्रेस के पार्षद
वोटिंग के दौरान दोनों ही दलों के पार्षद बसों में सवार होकर मतदान स्थल पहुंचे। कांग्रेस की बस में त्रिलोकी कल्ला,भंवर कूकणा,विक्की चढ्ढा कांग्रेस के पार्षदों को लेकर पहुंचे। तो भाजपा विधायक जेठानंद व्यास,डॉ सत्यप्रकाश आचार्य,शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ तथा मोहन सुराणा भाजपा पार्षदों को लेकर मतदान करवाने पहुंचे। इससे पहले तीन निजी कारों में निर्दलीय पार्षदों को लेकर बाउंसर पहुंचे। जब कांग्रेस की बस लेकर कांग्रेसी पार्षद पहुंचे तो पुलिस की ओर से बेरिकेटस पर ही बस को रोक लिया। जिससे एक बारगी माहौल गर्मागया। नारेबाजी के बाद माहौल गर्म होता देख पुलिस ने निगम के मुख्य गेट तक बस को आने की इजाजत दे दी।

पार्षदों को ही प्रवेश
महापौर चुनाव में नगर निगम क्षेत्र के 80 वार्डों से निर्वाचित पार्षद मतदान किया।जिला निर्वाचन अधिकारी निशांत जैन ने बताया कि मतदान पर मोबाइल,बीडी-सिगरेट,गुटखा आदि ले जाने पर प्रतिबंध रहा।मतदान स्थल से दो सौ मीटर तक बेरिकेडिंग की गई। जिसमें केवल पार्षदों को ही प्रवेश दिया गया।

कल्ला ने गिनाई प्राथमिकताएं
कल्ला ने अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा कि वे सभी पार्षदों के साथ बैठकर शहर की सफाई व्यवस्था को सुचारू करने के लिये काम करेंगे।इसके अलावा शहर की प्र्रकाश व्यवस्था,नालियों के निर्माण सहित अनेक कमियों को दूर करने के लिये सभी के सहयोग से काम किया जाएगा।उन्होंने कहा कि निगम की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिये प्लान बनाया जाएगा।जिससे निगम आत्मनिर्भर बन सकें और आर्थिक हालात सुधरें। महापौर कल्ला ने सभी साथी पार्षदों व निर्दलीय पार्षदों को बधाई देते हुए शहरवासियों का आभार जताया और सहयोग की अपील की।

जनता के विश्वास को रखेंगे कायम
पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला ने कहा कि जिस प्रकार आमजन ने कांग्रेस पर बोर्ड बनाकर विश्वास जताया है। उस विश्वास को कायम रखेंगे। अनिल कल्ला सभी पार्षदों को साथ लेकर वार्ड स्तर तक समस्याओं का निस्तारण करेंगे।

क्रॉस वोटिंग बना चर्चा का विषय
कांग्रेस ने परिणामों के बाद बहुमत हासिल कर 42 सीटें जीती। वहीं भाजपा 27 सीटों तक सिमट गई। 10 निर्दलीय और एक रालोपा के पार्षद जीतकर निगम पहुंचे। महापौर के चुनाव के दौरान जिस प्रकार का माहौल बना। उससे भाजपा के दावों पर पानी फेर दिया। भाजपा ने अपने 27 पार्षदों के अलावा आठ निर्दलीयों के साथ होने का दावा करते हुए 51 वोट हासिल करने की बात कही थी। लेकिन 35 वोटों की गणित लेकर कांग्रेस खेमें में सैंधमारी की सोचने वाली भाजपा महज 30 वोटों में सिमट गई। जो इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि कही न कही भाजपा व समर्थित निर्दलीयों में से किसी न किसी ने क्रॉस वोट कर भाजपा को झटका दिया है। महापौर के परिणाम के उपरांत कांग्रेस को मिले 50 वोटों ने भाजपा खेमे की हवा निकाल दी और क्रॉस वोटिंग शहर भर में चर्चा का विषय बनी हुई है।

उप महापौर के लिये चुनाव कल
निकाय चुनाव के अंतिम चरण में 22 सितंबर को उप महापौर पद का चुनाव होगा। जिसमें 10 बजे बैठक होगी और 11 बजे नामांकन पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। 11:30 नामांकन पत्रों की जांच होगी। दोपहर 2 बजे तक नाम वापसी का समय रहेगा और यदि आवश्यकता हुई तो दोपहर 2:30 बजे से 5 बजे तक मतदान होगा और उसके बाद परिणाम जारी हो जाएगा।

 

 

कौन हैं बीकानेर के नए मेयर अनिल कल्ला?
अनिल कल्ला बीकानेर नगर निगम के पांचवें नवनिर्वाचित महापौर हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ और जमीनी राजनेता हैं। 21 सितंबर 2026 को हुए नगरीय निकाय चुनाव में उन्होंने भाजपा के सुरेन्द्र सिंह शेखावत को 50 बनाम 30 वोटों के बड़े अंतर से हराकर बीकानेर के पांचवें महापौर के रूप में कमान संभाली है।अनिल कल्ला हाल ही में संपन्न हुए बीकानेर नगर निगम चुनाव 2026 में वार्ड नंबर 73 से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद चुने गए हैं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी दीपक पारीक को हराकर यह चुनाव जीता था।वे वर्तमान में जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।वे पिछले 33 वर्षों से अधिक समय से कांग्रेस पार्टी में एक सक्रिय और वफादार कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं। बीकानेर शहर कांग्रेस अध्यक्ष के लिए भी पूर्व में दो बार उनका नाम प्रमुखता से चर्चा में आ चुका है।वे ‘राजीव यूथ क्लब’ के अध्यक्ष भी हैं, जिसके माध्यम से वे लगातार बीकानेर में सामाजिक, सांस्कृतिक और युवा कल्याण से जुड़ी गतिविधियों का संचालन करते रहे हैं।वे कैंसर पीडि़तों की मदद करने वाली जानी-मानी संस्था के साथ बतौर वॉलंटियर जुड़े हुए हैं और बीकानेर के अस्पतालों में मरीजों के मार्गदर्शन तथा सहायता के लिए सक्रिय रहते हैं।अपनी इसी साफ-सुथरी छवि, लंबे राजनीतिक अनुभव और मजबूत पारिवारिक पकड़ के कारण वे बीकानेर में कांग्रेस के पार्षदों और निर्दलीयों को एकजुट कर शहर के नए मुखिया बनने में कामयाब रहे।80 सदस्यों वाले बीकानेर नगर निगम के सदन में इस बार का मुकाबला सिर्फ वोटों की गिनती तक सीमित नहीं थी,बल्कि यह राजनीतिक कौशल,विधायकों के रणनीति प्रबंधन और बाड़ाबंदी के कड़े पहरे की परीक्षा भी थी। पार्षदों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) और विरोधी गुट की ओर से की जाने वाली संभावित सेंधमारी से बचाने के लिए दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों और नवनिर्वाचित पार्षदों की कड़ी बाड़ाबंदी कर रखी थी।

बीकानेर को मिला 5वां महापौर
बीकानेर को वर्ष 2008 में नगर परिषद से अपग्रेड करके नगर निगम का दर्जा दिया गया था। इसके बाद से अब तक शहर को 4 महापौर मिल चुके हैं:

मकसूद अहमद (2008): तत्कालीन सभापति, जिन्हें नगर निगम बनने पर पहला महापौर बनने का गौरव प्राप्त हुआ।
भवानी शंकर शर्मा (2009): कांग्रेस पार्टी से बीकानेर के दूसरे महापौर चुने गए।
नारायण चोपड़ा (2014): भारतीय जनता पार्टी से तीसरे महापौर बने।
सुशीला कंवर राजपुरोहित (2019): भाजपा की ओर से चौथी महापौर निर्वाचित हुईं।
अब तक के इतिहास में दो बार कांग्रेस (मकसूद अहमद व भवानी शंकर शर्मा) और दो बार बीजेपी (नारायण चोपड़ा व सुशीला कंवर) के महापौर सत्ता संभाल चुके हैं। आज के नतीजों के बाद बीकानेर के इतिहास में किसी एक दल के महापौरों की संख्या बढ़कर 3 हो जाएगी।

32 साल का चुनावी इतिहास: 17 साल बाद कांग्रेस ने बनाई स्पष्ट बढ़त
बीकानेर के नगरीय निकाय चुनावों के पिछले 32 वर्षों (1994 से 2026) के इतिहास को देखें तो कुल 7 निकाय चुनावों में 445 पार्षद चुनकर सदन पहुंचे हैं। इनमें बीजेपी के 198 और कांग्रेस के 165 पार्षद रहे हैं। कुल मिलाकर बीजेपी का दबदबा रहा।लेकिन 2026 के इस चुनाव में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर 17 साल बाद (वर्ष 2009 के बाद) बीजेपी पर इतनी बड़ी और स्पष्ट बढ़त बनाई है। इससे पहले 2009 में 60 वार्डों में से कांग्रेस ने 34 सीटें जीती थीं। 32 सालों में बीकानेर सदन का आकार 55 वार्डों से बढ़कर 80 वार्डों तक पहुंच गया।

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