सरकारी अध्यापक ने दिखाया चुनाव आयोग को ठेंगा,खुलेआम किया प्रचार,बांटी शराब
तहलका न्यूज,बीकानेर।एक ओर तो चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव करवाने के दावे करता है।वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मचारी के द्वारा खुलेआम चुनाव आचार के लिये बनाएं गये नियमों की धज्जियां उड़ा गई। इतना ही नहीं चुनाव करवाने के लिये लगाई गई ड्यूटी को कटवाकर खुलेआम अपनी भाई की पुत्रवधु के चुनाव में प्रचार किया। साथ ही सरकारी कर्मचारी होने का फायदा उठाते हुए सरपंच चुनाव को प्रभावित भी किया।मामला कोलायत विधानसभा क्षेत्र के कोटड़ा व नाईयों की बस्ती का है।जहां सरकारी कर्मचारियों द्वारा प्रत्याशियों के पक्ष में खुलकर चुनाव प्रचार करने के मामले सामने आएं है।पता चला है कि कोटड़ा ग्राम पंचायत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय समरदा पूगल के उप प्रधानाचार्य राजेन्द्र मेघवाल ने पोस्टिंग के दौरान ही चुनाव में खुलकर भागीदारी निभाई।जिसकी जिला निर्वाचन अधिकारी को शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।बताया जा रहा है कि राजेन्द्र मेघवाल ने कोटड़ा सरपंच बनी सुनीता मेघवाल का नाम ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में जुड़वाया। जबकि वो वहां की निवासी थी ही नहीं।आरोप है कि राजेन्द्र मेघवाल की फोटो प्रत्याशियों के पोस्टर बैनर पर भी लगी हुई थी।इसको लेकर पीडि़त पक्ष की ओर से प्रेस वार्ता कर दस्तावेज उपलब्ध करवाएं गये है।
बीएलओ ने संभाला चुनाव का मोर्चा
जिला निर्वाचन अधिकारी निशांत जैन को ओमप्रकाश सैन की ओर से की गई शिकायत में सामने आया है कि ग्राम पंचायत चांडासर के रोजगार सहायक गणेशाराम सारण जो वर्तमान में बीएलओ भी है।सारण ने अपनी ड्यूृटी चांडासर में करने बजाय नाईयों की बस्ती में की।यहां सारण पद का दुरूपयोग कर चुनाव में लगे कार्मिकों को प्रभावित किया और निष्पक्ष चुनाव में बाधक बने।इन्होंने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए खुलेआम एक प्रत्याशी के पक्ष में मतदाताओं को वोट देने का दबाव बनाया।
दोनों पर शराब व रूपये बांटने के आरोप
सैन ने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि दोनों ही सरकारी कर्मचारियों ने कोटड़ा व नाईयों की बस्ती में अपने चेहते प्रत्याशियों को जीताने के लिये रूपये व शराब बांटी। जिसकी फोटो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई है। जिसमें राजेन्द्र मेघवाल एक शराब के ठेके पर बैठा नजर आ रहा है।इतना ही नहीं इनकी कॉल डिटेल निकाली जाएं तो निश्चित रूप से ओर भी खुलासे हो सकते है।
बज्जू खालसा में लगी चुनाव ड्यूटी,मगर नहीं गए
बताया जा रहा है कि राजेन्द्र मेघवाल की चुनाव ड्यूटी द्वितीय चरण के मतदान में बज्जू खालसा लगाई गई थी।लेकिन अपने राजनीतिक प्रभाव व सरकारी कर्मचारियों से सांठगांठ कर ड्यूटी हटवा ली और पूरी तरह चुनाव में लगे रहे।जिसके अनेक सबूत जिला निर्वाचन अधिकारी को देने के बाद भी किसी प्रकार की कार्रवाई अब तक नहीं की गई है।
ये भी लगाएं आरोप
सरपंच चुनाव के दौरान चुनाव प्रचार में कोटडा और कोडमदेसर सरपंच प्रत्यशी एक बार भी चुनाव प्रचार में नहीं आये।यहां सिर्फ सरकारी टीचर राजेंद्र मेघवाल ने रूपरेखा तैयार की।सरपंच प्रत्याशी सुनीता का कार्यालय राजेंद्र मेघवाल द्वारा खोला गया।जिस पर राजेंद्र मेघवाल सुनीता के होर्डिंग पोस्टर लगे थे।साथ ही चुनाव प्रचार के पेम्प्लेट पर भी राजेंद्र का नाम था।चुनाव मतदान से पहले चुनाव अधिकारी कलेक्टर को दो सरपंच प्रत्यशियों द्वारा लिखित में शिकायत करने के बावजूद भी राजेन्द्र पर दंडनात्मक कार्रवाई नहीं की गई।चुनाव के समय राजेंद्र मेघवाल द्वारा कोडमदेसर स्थित शराब के ठेके पर बैठकर वोटरों को शराब बांटी गई।कोटडा सरपंच चुनाव के दौरान वोटरों की सोशल आईडी पर राजेंद्र मेघवाल के प्रसार की तस्वीरें अपलोड करवाई गई।पूर्व में राजेंद्र मेघवाल के परिवार के लोग सरपंच प्रतिनिधि रहे।लेकिन सारी प्रशासनिक करवाई जैसे पंचायत समिति व जिला परिषद में कागजी करवाई।टेंडर प्रक्रिया,सरकारी कर्मचारियों के साथ लेनदेन राजेंद्र मेघवाल के हस्ताक्षर से ही हुए हैं। जिसकी जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।
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