दिल्ली|माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से आयोजित सहायक अध्यापक संविदा भर्ती 2022-23 में स्नातक में तीनों वर्ष मुख्य विषय अंग्रेजी का ‘अनिवार्य’ तौर पर अध्ययन करने वाले स्नातक डिग्रीधारी चयनितों की नियुक्ति के मार्ग की अंतिम कानूनी बाधा भी दूर हो गई है|मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार व माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से दायर रिव्यु पिटिशन को खारिज कर दिया है|स्नातक में तीनों वर्ष अंग्रेजी विषय को अनिवार्य तौर पर उत्तीर्ण कर इस भर्ती में आवेदन कर अंतिम तौर पर चयनित अभ्यर्थियों को निदेशालय ने इस तर्क के साथ अपात्र घोषित कर दिया था कि इन अभ्यर्थियों ने अंग्रेजी विषय ‘वैकल्पिक’ विषय के रूप अध्ययन नहीं किया है बल्कि अनिवार्य विषय के तौर पर अध्ययन किया है | संविदा भर्ती नियमावली 2022 के अनुसार इस भर्ती के विषय अध्यापक के पास संबंधित विषय स्नातक में वैकल्पिक विषय के रूप में होना चाहिए|निदेशालय के इस तर्क को अनिवार्य अंग्रेजी स्नातक डिग्रीधारी चयनित अभ्यर्थी नवीन स्वामी व अन्य ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौति दी थी|हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अक्टूबर 2023 में तथा खंडपीठ ने जनवरी 2025 में स्नातक में तीनों वर्ष अध्ययनित अंग्रेजी विषय को राजस्थान के विभिन्न विश्वविद्यालयों के स्नातक डिग्री के वैल्कपिक अंग्रेजी विषय के समकक्ष करार देकर नियुक्ति के आदेश दिए थे|परन्तु निदेशालय व सरकार ने खंडपीठ के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी की मार्फत चुनौति दी थी जो कि अगस्त 2025 में खारिज हो गई थी|एसएलपी खारिज के आदेश को निदेशालय ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौति देते हुए रिव्यु-पिटिशन दायर कर दी थी जिसे जस्टिस विक्रम नाथ व जस्टिस संदीप मेहता की अदालत ने प्रारम्भिक स्टेज पर ही खारिज कर दिया है|गौरतलब है कि तीन वर्षीय अनिवार्य अंग्रेजी स्नातक डिग्री को प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय,माध्यमिक शिक्षा निदेशालय,आरपीएससी व आरएसएसबी विगत अनेक भर्तियों में वैकल्पिक स्नातक डिग्री के समक्ष घोषित कर चुके हैं|बावजूद इसके इस प्रकरण को बार-बार अदालत में ले जाना संबंधित भर्ती एजेंसी की कार्यशैली पर बड़ा सवाल है |
दूरगामी परिणाम होंगे : मामले के नजदीकी जानकार वेदपाल धानोठी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले की रिव्यु पिटीशन खारिज कर दिए जाने से जहाँ संविदा अध्यापक भर्ती 2022-23 में नियुक्ति से वँचित अनिवार्य अंग्रेजी डिग्रीधारी अनेक अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अंतिम बाधा भी दूर हो गई है,वहीं संबंधित भर्ती एजेंसी द्वारा किसी न किसी बहाने से अलग अलग भर्तियों में अनिवार्य अंग्रेजी स्नातक डिग्रीधारी प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र के अभ्यर्थियों को बार-बार कानूनी लड़ाई में झोंकने की प्रवृति पर भी लगाम लगेगी|
