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तहलका न्यूज,बीकानेर।शरह नथानियान गोचर भूमि संरक्षण एवं विकास समिति ने आज तहसीलदार (राजस्व) को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि शरह नथानियान गोचर भूमि में फील्ड फायरिंग रेंज के नाम पर अवैध रूप से भूमि का नामांतरण एवं सीमांकन करने का प्रयास किया जा रहा है,जो न केवल कानून के विरुद्ध है बल्कि राज्य सरकार एवं गोचर समितियों व पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी के साथ हुए पूर्व समझौतों का भी उल्लंघन है।समिति के शिव कुमार गहलोत ने ज्ञापन में बताया कि वर्ष 1987 में एक सामान्य आदेश के माध्यम से पुलिस विभाग को प्रशिक्षण के लिए गोचर भूमि का सीमित उपयोग दिया गया था,किंतु उक्त भूमि का आज तक राजस्व अभिलेखों में विधिवत नामांतरण दर्ज नहीं हुआ है।इसके बावजूद अब बिना किसी वैधानिक आधार के भूमि का नामांतरण दर्ज करने एवं सीमांकन की कार्रवाई की जा रही है।समिति ने यह भी कहा कि यह गोचर भूमि शहर की आबादी के समीप स्थित है,जहां प्रतिदिन हजारों गौवंश एवं अन्य पशु चराई करते हैं।पुलिस प्रशिक्षण के दौरान होने वाली फायरिंग से पूर्व में अनेक पशुओं की मृत्यु की घटनाएं सामने आई हैं,जिससे आमजन में भी चिंता व्याप्त है।ज्ञापन में वर्ष 2022 में तत्कालीन सरकार एवं गोचर संरक्षण आंदोलन के बीच हुए समझौते का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उस समझौते के तहत फील्ड फायरिंग रेंज को गोचर भूमि से अन्यत्र स्थानांतरित करने पर सहमति बनी थी।इसके अतिरिक्त सितंबर 2025 में भी राज्य सरकार एवं आंदोलनकारियों के बीच यह सहमति बनी थी कि गोचर भूमि का भविष्य में किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा।समिति के सूरज प्रकाश राव का कहना है कि इन दोनों समझौतों के बावजूद वर्तमान में गोचर भूमि का नामांतरण दर्ज करने का प्रयास पूरी तरह अनुचित एवं समझौतों की भावना के विपरीत है।समिति के मनोज कुमार सेवग ने प्रशासन से मांग की है कि शरह नथानियान गोचर भूमि में फील्ड फायरिंग रेंज के नाम पर किसी भी प्रकार की नामांतरण अथवा सीमांकन की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से रोकी जाए तथा राज्य सरकार द्वारा गोचर संरक्षण के संबंध में किए गए सभी समझौतों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए।