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तहलका न्यूज,बीकानेर।नगर निगम की सरकारी भूमि जोड़बीड़ पर गाय की चर्बी से घी जैसा पदार्थ बनाने के कथित कारोबार के तार प्रदेश से बाहर जुड़े होने की खबर सामने आ रही है।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के एक के व्यक्ति ने स्थानीय मृत पशुओं को उठाने वाली ठेका कंपनी से यह माल खरीद कर जयपुर रोड स्थित एक अवैध फैक्ट्री में इसका संग्रहण कर उससे घी बनाने का काम करता है और देशभर में सप्लाई करता है।यह फैक्ट्री अनेक बार संदेह के घेरे में आ चुकी है।लेकिन न तो स्वास्थ्य महकमेें के आलाधिकारियों की इस पर नजर पड़ी है और न ही जिले के आलाधिकारियों की।ऐसे में यह अवैध काम कितने सालों से बीकानेर में चल रहा है।यह भी आमजन के लिये प्रश्न बना हुआ है।पता चला है कि निगम में तीन जनों की सिडिकेंट इस खेल को चला रही है।जिनका मृत पशु उठाने का ठेका करीब 15 सालों से है।2025 में इस ठेके को नोखा की कंपनी मैसर्स बाबा रामदेव श्रमिक सप्लायर्स के मनोज कुमार ने तीन गुना अधिक राशि में उठाया।परन्तु तीन महीने में ही इस त्रिकोणीय सिंडिकेंट ने निगम के बाबूओं व लेखा शाखा के कार्मिकों के साथ मिलकर ठेका ही निरस्त करवा दिया।जिसका प्रमाण इस बात से भी मिलता है कि ठेका निरस्त करने के आदेश के दिन ही तीन आदेश एक निगम आयुक्त की ओर से निकाले गये।जिसमें पुराना ठेका निरस्त करने,पुरानी ठेका कंपनी को नए ठेके के रूप में काम करने और पुराने ठेका कंपनी के मृत पशु अवशेषों को उठाने के आदेश शामिल है।

एक ही तारीख और तीन आदेश
मजे की बात तो यह है कि निगम की ओर से ठेका शर्तों की अवेहलना पर ठेका निरस्त करने के अधिकार आयुक्त को दिए हुए है।लेकिन उससे पहले निरस्त करने के कारणों व अन्य बिन्दुओं का भी उल्लेख है।ऐसे में 21 मई 2025 क्रमांक/स्वा/2025/8508 को आयुक्त ने नोखा की ठेका कंपनी मैसर्स बाबा रामदेव श्रमिक सप्लायर्स के मनोज कुमार को आदेशित कर जिसमें फर्म का कार्य संतोषजनक रूप से संपादित नहीं करने को कारण बताते हृुए ठेका तुरंत प्रभाव से निरस्त करने के लिये कहा गया। इसी दिन आयुक्त की ओर से क्रमांक/स्वा/2025/8525 में पशु अनुभाग प्रभारी को ओमप्रकाश जावा को आदेश निरस्त की बात को इंगित करते हुए जोड़बीड़ क्षेत्र में मृत पशुओं से संबंधित समस्य सामग्री अपने कब्जे में लेने के निर्देश दिए। इसी तारीख यानि 21 मई को आयुक्त ने एक ओर फरमान क्रमांक/स्वा/2025/8532 निकाल मैसर्स बी के नागौरा स्कीन कंपनी को नवीन कार्य आदेश जारी करते हुए मृत पशुओं को उठाने के कार्य सम्पादित करने को कहा गया। मजे की बात तो यह है कि इन तीनों आदेशों को एक ही दिन में जारी कर उनकी प्राप्ति भी कर ली गई।जबकि स्वयं निगम ने किसी प्रकार के आदेश को ठेका कंपनी के नामित पत्ते पर भेजने का अनुबंध कर रखा था। इतना ही नहीं जो शिकायत मैसर्स बाबा रामदेव श्रमिक सप्लायर्स के मनोज कुमार के लिये निगम को मिली। उसकी पड़ताल तक करना निगम अधिकारियों उचित नहीं लगा।जो इस बात का संकेत देता है कि निगम के बाबू व अधिकारी पुरानी फर्म के जरिये ही मृत पशु उठाने का ठेका करवाने चाहते थे।

जमा राशि भी जब्त,चक्कर लगा रहा परिवादी
आनन फानन में की गई ठेका निरस्ती की कार्रवाई पर इसलिए भी सवाल खड़ा होते है कि ठेका नियम शर्तों में किसी प्रकार की शिकायत के बाद उल्लंघन की स्थिति आती है तो उस पर जुर्माना और शास्ति का प्रावधान है।जो जमा धरोहर राशि से काटी जाने का प्रावधान था।लेकिन निगम के अधिकारियों व बाबूओं ने ऐसा कुछ नहीं किया।मैसर्स बाबा रामदेव श्रमिक सप्लायर्स के मनोज कुमार की ओर से अलग अलग तारीखों मेें जमा करवाई गई 27 लाख से अधिक की राशि को शिकायतों के आधार पर बिना जांच पड़ताल के जब्त कर ठेका निरस्त कर दिया। उधर मैसर्स बाबा रामदेव श्रमिक सप्लायर्स के मनोज कुमार की ओर से ही पिछले कई सालों से एक ही राशि में अटकी ठेका राशि को तीन गुना करवाने में इसी कंपनी का योग रहा। इसके बाद जब पुरानी कंपनी को ठेका मिला तो उसकी राशि 14 लाख रूपये कम में दिया गया।

क्या प्रशासन इस प्रकरण को लेकर होगा गंभीर
गाय की चर्बी से घी जैसा पदार्थ बनाने का कथित कारोबार के विडियो सोशल मीडिया पर जारी होने के बाद क्या प्रशासन इस प्रकरण को लेकर गंभीर होगा और अपने स्तर पर निष्पक्ष जांच करवाएगा। यह सवाल अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।अगर जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच करता है तो इस खेल को उजागर करने में कामयाब हो पाएगा।लोगों का कहना है कि मुद्दा केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं जुड़ा हुआ।बल्कि लोगों के स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है।ऐसे में जिला प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष व त्वरित जांच करनी चाहिए।ताकि इस प्रकार के कृत्य करने वालों को उजागर किया जा सकें।