तहलका न्यूज,बीकानेर।भारतीय संस्कृति,इतिहास और पारिवारिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से कार्यरत अखिल भारतीय वंशावली संरक्षण एवं संवर्धन संस्थान देशभर में वंशावली लेखन की प्राचीन परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।संस्थान का मुख्य उद्देश्य विभिन्न समाजों,जातियों एवं परिवारों की ऐतिहासिक वंशावलियों का संकलन,संरक्षण तथा नई पीढ़ी तक उनका हस्तांतरण सुनिश्चित करना है यह वक्तव्य अखिल भारतीय वंशावली संरक्षण एवं संवर्धन संस्थान की देशनोक में आयोजित दो दिवसीय बैठक में संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष परमेश्वर ब्रह्मभट ने कहे।संस्थान के राष्ट्रीय सरंक्षक धर्म जागरण समन्वय के राष्ट्रीय सह प्रमुख अरुणकांत ने कहा कि भारतीय सभ्यता में वंशावली का विशेष महत्व रहा है।प्राचीन काल से ही विभिन्न क्षेत्रों में भाट,राव,जागा,बड़वा एवं अन्य वंशावली लेखक परिवारों के इतिहास,सामाजिक परंपराओं और पीढ़ियों का लेखा-जोखा सुरक्षित रखते आए हैं।यह धरोहर न केवल पारिवारिक पहचान का आधार है,बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत भी है।संस्थान द्वारा समय-समय पर राष्ट्रीय एवं प्रांतीय स्तर पर सम्मेलन,संगोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं,जिनमें वंशावली संरक्षण की आवश्यकता,डिजिटलीकरण तथा युवा पीढ़ी की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जाता है। संस्थान का मानना है कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से पारंपरिक वंशावली अभिलेखों को सुरक्षित रखकर आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सकता है।धर्म जागरण समन्वय के अखिल भारतीय परियोजना प्रमुख ने कहा कि तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में पारिवारिक इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को सहेजना समय की आवश्यकता है।वंशावली अभिलेख समाज के इतिहास,रीति-रिवाजों और सामाजिक संरचना को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।जिसका उद्देश्य परंपराओं और ऐतिहासिक अभिलेखों को सुरक्षित रखना है।संस्थान ने समाज के सभी वर्गों से अपने पारिवारिक अभिलेखों, पुरानी वंशावलियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखने तथा इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है।ताकि भारत की समृद्ध वंशावली परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित रखा जा सके।संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री बाबूलाल भाट ने बताया कि देशनोक में आयोजित अखिल भारतीय बैठक में देश से 10 प्रान्तों से 46 प्रान्त के पदाधिकारी शामिल हुए।