जयनारायण बिस्सा
तहलका न्यूज,बीकानेर।निकाय चुनाव को लेकर राज्य सरकार के स्तर पर हो रहे बदलाव के बीच निकाय चुनाव के दावेदारों के साथ कांग्रेस,भाजपा और आम आदमी पार्टी सहित अन्य राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। बीकानेर में भी निकाय चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई है हालांकि दोनों ही पार्टियों को अब महापौर तथा वार्डों को लेकर लॉटरी का इंतजार है।करीब दो साल की देरी के बाद होने जा रहे निकाय में संभावित प्रत्याशियों के सामने इस बार कई चुनौतियां एक साथ खड़ी हैं।हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ानी शुरू कर दी है,हालांकि आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा अभी बाकी है।ऐसे में दावेदारों को प्रचार-प्रसार के लिए सीमित समय मिलने की संभावना है।वहीं वार्डों के परिसीमन और आरक्षण के नए समीकरण चुनाव को पहले से अधिक रोचक बना रहे हैं।दो वर्षों से जनप्रतिनिधियों के अभाव में नगर निगम में प्रशासकीय व्यवस्था लागू रही।इस दौरान सड़क,सफाई,पेयजल ,स्ट्रीट लाइट,नालों की सफाई और अतिक्रमण जैसे स्थानीय मुद्दे लोगों के बीच प्रमुख शिकायत बने है।ऐसे में प्रत्याशियों को कम समय में इन मुद्दों पर जनता का भरोसा जीतने की चुनौती होगी।
आरक्षण पर तस्वीर साफ नहीं,दावेदार इंतजार में
इस बार पहली बार कराए गए ओबीसी सर्वे के बाद आरक्षण व्यवस्था को लेकर असमंजस बना हुआ है।पिछली बार 80 वार्डों के लिए लॉटरी प्रणाली से आरक्षण तय किया गया था,जिसमें 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं। अब यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार पुरानी व्यवस्था लागू रखेगी या नया फार्मूला अपनाएगी।इसी कारण कई संभावित उम्मीदवार फिलहाल खुलकर चुनावी प्रचार शुरू करने से बच रहे हैं।वार्ड परिसीमन के बाद कई क्षेत्रों की सीमाएं बदल गई हैं और ग्रामीण इलाकों को नए शहरी वार्डों में शामिल किया गया है।इससे पुराने वोट बैंक का समीकरण बदल गया है।उम्मीदवारों को नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने और मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी होगी।वहीं राजनीतिक दलों के सामने भी आरक्षण तय होने के बाद कम समय में उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति तैयार करने की चुनौती रहेगी।उसके बाद भी वार्ड पार्षद बनने की चाह इस तरह जगने लगी है मानो उन्हें टिकट मिल ही गया।ऐसे में टिकट मिले या न मिले उनको चुनाव लड़ाने वाले वोटर न होते हुए भी सोशल मीडिया पर समर्थक उन्हेंं वोट देकर उस वार्ड का अपनी तरफ से पार्षद बना रहे है।जबकि अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि जो पुरूष या महिला कार्यकर्ता जिस वार्ड के लिये अपनी दावेदारी पेश कर रहे है।वो वार्ड किसी क्षेणी के लिये आरक्षित होगा।फिलहाल सोशल मीडिया पर पार्षद बनने की बाढ़ शुरू हो चुकी है।
6 लाख से ज्यादा मतदाता चुनेंगे शहर की सरकार
जिला प्रशासन स्तर पर 15 सितम्बर 25 में किये वार्डों के परिसीमन के आधार पर करीब 619385 मतदाता अपने जनसेवकों का चुनाव करेंगे। 80 वार्डों के लिये होने वाले इन निकाय चुनावों में अगर यही परिसीमन और मतदाता सूची रही तो वार्ड नं 57 सबसे बड़ा और वार्ड 65 सबसे छोटा मतदाता वाला वार्ड होगा।इनमें 30 वार्ड ऐसे है जिनमें मतदाताओं की संख्या आठ हजार से उपर,42 वार्डों में सात हजार से ज्यादा मतदाता तथा आठ वार्डों में 6 हजार से ऊपर मतदाता है।
