बीकानेर बना हृदय रोग उपचार का नया केंद्र
सात वर्षों में 20,000 से अधिक जटिल हार्ट इंटरवेंशन, हजारों मरीजों को मिला नया जीवन
तहलका न्यूज,बीकानेर। कभी हृदय रोग के गंभीर मरीजों को इलाज के लिए जयपुर,दिल्ली,अहमदाबाद या मुंबई का रुख करना पड़ता था।हार्ट अटैक,जटिल एंजियोप्लास्टी,पेसमेकर या जन्मजात हृदय रोग जैसी समस्याओं के उपचार के लिए मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक,मानसिक और शारीरिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।लेकिन पिछले सात वर्षों में यह तस्वीर तेजी से बदली है।इस परिवर्तन के केंद्र में हैं वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.बी.एल. स्वामी,जिन्होंने बीकानेर में अत्याधुनिक हृदय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराकर पूरे उत्तर-पश्चिम राजस्थान को नई पहचान दिलाई है।कोरोना काल में स्थापित आयुष्मान हार्ट केयर सेंटर आज हृदय रोग उपचार का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।यहां अब तक 20,000 से अधिक जटिल हार्ट इंटरवेंशन सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।इनमें अनेक ऐसे उपचार शामिल हैं जिन्हें कभी केवल देश के बड़े महानगरों के अस्पतालों में ही संभव माना जाता था।

जब बीकानेर में पहली बार हुई आधुनिक तकनीकों की शुरुआत
डॉ.स्वामी ने क्षेत्र में कई अत्याधुनिक तकनीकों को पहली बार उपलब्ध कराया।इनमें लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांटेशन विशेष रूप से उल्लेखनीय है।यह तकनीक पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में अधिक उन्नत मानी जाती है और मरीज को बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करती है।उच्च रक्तचाप से पीडि़त ऐसे मरीज जिनकी बीमारी दवाओं से नियंत्रित नहीं हो रही थी,उनके लिए रिनल डिनर्वेशन तकनीक का सफल उपयोग किया गया। वहीं धमनियों में अत्यधिक कैल्शियम जमा होने के कारण जटिल हो चुकी एंजियोप्लास्टी के लिए ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी और रोटा एब्लेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया।रोटा एब्लेशन में लगभग 1.80 लाख आरपीएम की गति से घूमने वाले डायमंड बर्र द्वारा धमनियों में जमे कठोर कैल्शियम को हटाकर सफल एंजियोप्लास्टी की जाती है।

हार्ट अटैक के मरीजों के लिए बने जीवनदाता
चिकित्सा विज्ञान में हार्ट अटैक के बाद के शुरुआती कुछ घंटे “गोल्डन ऑवर्स” कहलाते हैं। इसी अवधि में उपचार मिलने पर मरीज की जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।डॉ.स्वामी और उनकी टीम ने पिछले वर्षों में सैकड़ों मरीजों की इमरजेंसी प्राथमिक एंजियोप्लास्टी कर उन्हें नया जीवन दिया है।अनेक मामलों में मरीज अस्पताल पहुंचते समय गंभीर स्थिति में थे,लेकिन समय पर हस्तक्षेप के कारण वे सामान्य जीवन में लौट सके।कोरोना महामारी के दौरान जब अधिकांश लोग अपने घरों में सुरक्षित रहने का प्रयास कर रहे थे,तब डॉ. स्वामी और उनकी टीम दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटी रही।उस कठिन दौर में भी हार्ट अटैक के मरीजों की आपातकालीन एंजियोप्लास्टी लगातार जारी रखी गई।

जिन मरीजों को बायपास की सलाह थी, उन्हें मिली नई उम्मीद
डॉ.स्वामी ने जटिल और मल्टी-वेसल ब्लॉकेज वाले हजारों मरीजों की उन्नत तकनीकों द्वारा सफल एंजियोप्लास्टी की है।ऐसे अनेक मरीज,जिन्हें पहले बड़ी बायपास सर्जरी की सलाह दी जाती थी,उन्हें कम जोखिम वाली इंटरवेंशनल तकनीकों के माध्यम से राहत मिली।विशेष रूप से तीन-तीन धमनियों में ब्लॉकेज वाले मरीजों का उपचार कर उन्हें बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान की गई।

दिल की धड़कनों की समस्या का आधुनिक उपचार
हृदय की अनियमित या अत्यधिक तेज धड़कन से पीडि़त 200 से अधिक मरीजों का रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (क्रस्न्र) द्वारा सफल उपचार किया गया। इस प्रक्रिया के बाद कई मरीज वर्षों से चली आ रही समस्या से तत्काल राहत प्राप्त कर सके।

बच्चों के दिल की बीमारियों में भी बड़ी उपलब्धि
जन्मजात हृदय रोग से पीडि़त बच्चों के लिए भी केंद्र ने उल्लेखनीय कार्य किया है।बिना बड़ी सर्जरी के विशेष डिवाइस तकनीक द्वारा दिल के छेद बंद कर अनेक बच्चों को ओपन हार्ट सर्जरी से बचाया गया।इससे न केवल उपचार सरल हुआ बल्कि परिवारों पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ा।

गंभीर हृदय विफलता के मरीजों को मिला नया जीवन
कम पंपिंग क्षमता वाले गंभीर हृदय रोगियों में CRT-D और ICD जैसे अत्याधुनिक उपकरण प्रत्यारोपित किए गए।ये उपकरण अचानक हृदय गति रुकने के खतरे को कम करते हैं और मरीज के जीवन की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई मरीज, जिनकी जीवन प्रत्याशा सीमित मानी जा रही थी, आज सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

गरीबों के लिए बना सहारा
आयुष्मान भारत,चिरंजीवी,आरजीएचएस और अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से हजारों आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों का नि:शुल्क या रियायती उपचार किया गया है।इससे अनेक परिवारों को लाखों रुपये के खर्च से राहत मिली और समय पर उपचार संभव हो सका।

बीकानेर बना हृदय रोग उपचार का नया केंद्र
आज स्थिति यह है कि राजस्थान के अलावा हरियाणा,पंजाब,उत्तर प्रदेश,बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों से मरीज बीकानेर पहुंच रहे हैं।इतना ही नहीं,विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिक भी यहां उपचार के लिए आ चुके हैं।दर्दरहित एंजियोग्राफी,जटिल एंजियोप्लास्टी,आधुनिक पेसमेकर तकनीक और उन्नत कार्डियक इंटरवेंशन के कारण बीकानेर को अब देश के प्रमुख हृदय चिकित्सा केंद्रों में गिना जाने लगा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिली पहचान
हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. बी.एल. स्वामी को यूरोप, अमेरिका और सिंगापुर में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है।उन्हें कई प्रतिष्ठित फेलोशिप और प्रोफेशनल मान्यताएं भी प्राप्त हुई हैं।

“अब बीकानेर में ही संभव है अत्याधुनिक उपचार”
डॉ.बी.एल.स्वामी का कहना है कि चिकित्सा तकनीक में निरंतर हो रहे विकास का लाभ अब बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।उनका लक्ष्य है कि किसी भी हृदय रोगी को केवल उपचार के लिए बड़े महानगरों की ओर रुख न करना पड़े।सात वर्षों की इस यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया है कि समर्पण,आधुनिक तकनीक और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के बल पर बीकानेर जैसे शहर भी विश्वस्तरीय हृदय चिकित्सा सेवाओं के केंद्र बन सकते हैं।उत्तर-पश्चिम राजस्थान में हृदय रोग उपचार की यह नई कहानी हजारों परिवारों के लिए आशा,विश्वास और नए जीवन का प्रतीक बन चुकी है।