

तहलका न्यूज,बीकानेर। सर्व कामगार सेवा संघ,राजस्थान के प्रतिनिधि मंडल ने प्रदेशाध्यक्ष भंवर पुरोहित के नेतृत्व में भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण मंडल की संचालित योजनाओं को लेकर 22 सुत्री मांग पत्र मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को प्रेषित किया।श्रम विभाग में सचालित योजनाओं के आवेदनों में आ रही दिक्कतों से अवगत करवाया तथा मृत्यु सहायता में पिछले चार वर्षों से एफडी का भुगतान नामित को आज तक नही हुआ है जिससे मृतक के आश्रित रोजना श्रम विभाग के चक्कर निकालने को मजबूर है।संघ के प्रदेश महामंत्री आर एस हर्ष ने बताया कि निर्माण श्रमिकों के पंजीयन व योजना आवेदनों में अपील लगाने की समय सीमा समाप्त की जाये,आवेदनों का ऑटो रिजेक्ट बंद किया जाए,समय पर परिर्वतन सम्बंधित अधिसूचना जारी करे,अधिकारियों द्वारा आवेदनों की पूर्ण जांच की जाये,शुभ शक्ति योजना पुन:शुरू की जाये,प्रसुति सहायता राशि का भुगतान पुन:एक मुश्त किया जाये,शिक्षा सहायता योजना का निस्तारण समयावधि में करें,घायल एवं मृत्यु सहायता आवेदनों का भुगतान तय समय में किया जाये,सुलभ आवास योजना का लाभ भी सुनिश्चित किया जाये,रिन्यूअल में नियोजक की जानकारी का अपडेशन शुरू किया जाये,ट्रेड यूनियनों को प्रत्येक माह श्रमिकों की सूची विभाग जमा करवाने हेतु निर्देशित करें,आवेदनों में नियोजक की आई डी पर ओटीपी भेजना अनिवार्य करे, स्टेशनरी राशि ऑनलाइन पॉर्टल से काटना बंद किया जाये, ट्रेड यूनियनों की एस एस ओ आईडी बनाई जाये,ई मित्रा पर एल डी एम एस के सभी पेज खोले जाये,एल डी एम एस पॉर्टल पर संलग्न दस्तावेजों को पूर्व की भांति डाऊनलोड करने का सिस्टम शुरू किया जाए,निरस्त पंजीयनों में अपलोड आधार व जन आधार हटाया जाये,ट्रेड यूनियनों के लिए जारी घोषणा पत्र में संशोधन किया जाये,घायल व मृत्यु आवेदनों का भुगतान समय किया जाये,सिलिकोसिस पीडि़त निर्माण श्रमिकों को चिन्हित कर लाभ दिलाया जाये,गैर निर्माण श्रमिकों के लिए गिव अप योजना लागू की जाये,निर्माण श्रमिकों के 60 वर्ष के पश्चात मासिक पेंशन शुरू की जाये,शिक्षा एवं कौशल विकास योजना का निस्तारण समयावधि में किया जाये।इस मौके पर प्रदेश मंत्री धन्नादास, संगठन मंत्री सुभाष पुरोहित,प्रचार मंत्री कैलाश सारस्वत,जिला महामंत्री लक्षमण कुमावत,विधि सलाहाकार पवन पुरोहित राजू गहलोत,जितेन्द्र सुथार,जगदीश शर्मा,रमेश चंद्र उपाध्याय सहित प्रदेश व जिले के पदाधिकारी मौजूद रहे।
