तहलका न्यूज,बीकानेर। सरकार की लेटलतीफी व आपसी समन्वय का खामियाजा अनेक बार आमजन को भोगना पड़ता है। जिसके कारण कई बार हालात बद से बदतर हो जाते है और जनता त्राहि त्राहि मचाती है। कुछ ऐसे ही हालात पिछले ढाई सालों से बीकानेर में देखने को मिल रहे है। जहां अनेक योजनाएं स्वीकृत होने के बाद भी अधरझूल में पड़ी है। यदि ये किसी भी भेदभाव के समय पर पूरी होती है तो निश्चित तौर पर जनता को इसका लाभ मिलता है। परन्तु ऐसा नहीं होता। इनमें से एक है बीछवाल में स्वीकृत नया जलाशय। पिछली कांग्रेस सरकार ने पांच साल पहलेेशहर में वर्ष 2052 की जनसंख्या के आधार पर जलापूर्ति सुचारू बनाए रखने के लिए दो हजार मिलियन लीटर (200 करोड़ लीटर) पानी भंडारण की क्षमता का नया जलाशय बनाये जाने की स्वीकृति दी थी और निर्माण कार्य भी शुरू हो गया था। लेकिन पिछले छ:माह से इसका काम रूका होने से यह समय पर पूरा नहीं हो पाया। बताया जा रहा है कि ठेकेदार व सरकार में किसी बात को लेकर आपसी समन्वय की कमी के चलते इसका काम रूका पड़ा है। इतना ही नहीं शोभासर में 3000 एम एल का नया जलहॉज का कार्य भी अटका पड़ा है।

मई 2026 तक करनी थी पूरी
बता दे कि शहर व आसपास के 32 गांवों में पेयजल समस्या के दीर्घकालीन समाधान के लिये कांग्रेस सरकार की ओर से वृहद पेयजल योजना की स्वीकृति को बजट घोषणा में शामिल कर इसकी मंजूरी की गई थी। इससे 13 लाख आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाएं जाने की योजना थी। इसकी निविदा 2021 में निकाली गई थी और पूरा कार्य 20 मई 2026 तक पूरा करना था। परन्तु इसका काम अब तक अधूरा होने से यहां जल संग्रहण की स्थिति नहीं बनी है। यदि यह समय पर पूरा हो जाता तो निश्चित तौर पर शहर की जनता को नहरबंदी के दौरान पानी के लिये हाहाकार नहीं मचाना पड़ता।

2052 तक की आबादी के लिए प्यास बुझाने का इंफ्रास्ट्रक्चर
पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला ने उनके जलदाय मंत्री कार्यकाल के समय 892 करोड़ के पायलट प्रोजेक्ट की तकनीकी स्वीकृति दी गई है। जो 2052 तक की आबादी के लिए प्यास बुझाने का इंफ्रास्ट्रक्चर 5 साल में तैयार किया। इसके अलावा सैकड़ों किलोमीटर नई पाइप लाइन बिछाने। 19 नई पानी की टंकियां बनाने,10 अंडर ग्राउंड पानी की टंकियां बनाने की योजना थी।

डॉ कल्ला ने किया निरीक्षण
पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला ने आज बीछवाल,शोभासर में नवनिर्मित अधूरे पड़े कार्यों का निरीक्षण किया। साथ ही उन्होंने बीछवाल व शोभासर जलाशय में पानी की उपलब्धता की जानकारी भी हासिल की। इस दौरान अभियंता ने डॉ कल्ला को बताया कि दो दिनों तक शहर को आपूर्ति के लिये पानी उपलब्ध है। साथ ही अधूरे पड़े कार्यों को लेकर जानकारी दी कि ठेकेदार पिछले 6 माह से काम नहीं कर रहा है। जिसके चलते कार्य रूका हुआ है। इसके पीछे आपसी समन्वय की कमी सामने आई।

अभी क्या है हालात
बीकानेर की बढ़ती आबादी को देखते हुए 2052 तक शहरवासियों की प्यास बुझाने के लिए शहर में दो नए जलाशय बन रहे हैं। एक बीछवाल और एक शोभासर। शोभासर जलाशय का काम 60 प्रतिशत पूरा,जबकि बीछवाल में 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया। इसकी भराव क्षमता 2500 एमएलडी है।बीछवाल में अभी 1475 एमएलडी भराव क्षमता का एक जलाशय है। नए जलाशय की भराव क्षमता 2500 एमएलडी है।बीछवाल में अभी 33 एमएलडी ही पानी फिल्टर होता है लेकिन 2037 तक यहां 30 एमएलडी और पानी फिल्टर होकर रोज सप्लाई के लिए उपलब्ध होगा।अभी 37840 किलो लीटर कैपेसिटी की पानी की क्षमता है, लेकिन 2037 तक 23150 किलोलीटर की क्षमता और बढ़ेगी।अभी 11 किलोमीटर दूरी तक पानी की सप्लाई होती है।

नहरबंदी में आमजन हुए परेशान
इंदिरा गांधी नहर की 45 दिन की लंबी बंदी के कारण आमजन को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ा। पानी की भारी किल्लत के चलते कई क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर एक दिन जलापूर्ति की जा रही है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से निजी पानी टैंकर से जल सप्लाई के लिये दरें भी तय की थी। उसके बाद भी प्रशासन का निजी टैंकर संचालकों का कोई नियंत्रण नहीं रहा। उन्होंने मनमाने तरीके से लोगों से टैंकर की राशि वसूल की। इतना ही नहीं कई जगहों पर तो लोगों ने प्रदर्शन कर पानी के लिये हाहाकार मचाया। अगर ये दोनों जल संग्रहण केन्द्र जल्द शुरू हो जाएं तो आगामी साल से जिले की जनता नहरबंदी के दौरान पानी के लिये परेशान नहीं होगी।