तहलका न्यूज,बीकानेर।सूचना के अधिकार से बचने और अपनी गर्दन बचाने के लिए सरकारी तंत्र किस हद तक जाली कहानियां गढ़ सकता है,इसका एक रोगटे खड़े कर देने वाला नमूना सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पांचू में सामने आया है। विभाग के ही आधिकारिक पत्राचार और टूर रिकॉर्ड ने भ्रष्ट दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं।पूरा मामला प्रार्थी किशन गोपाल छंगाणी द्वारा पांच जुलाई 2025 को लगाए गए एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा है,जिसमें उन्होंने 13 अगस्त 2019 को सीएचसी पांचू की ऑफिशियल ईमेल आईडी से भेजी गई।इस पर खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी नोखा के पत्र क्रमांक बीसीएमओ/2025/1175 (दिनांक 24/07/2025) के जवाब में सीएचसी पांचू के चिकित्सा अधिकारी प्रभारी ने अपने पत्र क्रमांक 314 में बकायदा लिखित में यह मनगढ़ंत आरोप मढ़ दिया कि”चूंकि हमारे यहां ईमेल-पासवर्ड खुले रहते हैं,इसलिए संविदा कार्मिक ने स्वयं ही ऑफिस के कंप्यूटर से खुद की मेल आईडी पर यह फाइल भेज ली थी।”
टूर रिकॉर्ड ने खोली पोल
अधिकारियों ने कार्मिक पर ठीकरा फोड़कर फाइल बंद करने की पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर ली थी,लेकिन वे यह भूल गए कि कानून के हाथ बहुत लबे होते हैं। अब पुख्ता रिकॉर्ड से यह सबसे बड़ा और खतरनाक खुलासा हुआ है कि जिस 13 अगस्त 2019 को यह ईमेल भेजा गया था,उस दिन वह कार्मिक पांचू मुख्यालय पर मौजूद ही नहीं था,बल्कि वह आधिकारिक तौर पर बीकानेर टूर (दौरे) पर था!इस अकाट्य सत्य ने स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी और पूरी प्रशासनिक मंडली को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।
असली हैकर कौन?
जब कार्मिक बीकानेर में ड्यूटी पर था,तो पांचू सीएचसी में बैठकर उसकी आईडी से ईमेल का बटन दबाने वाला असली गुनहगार कौन है?डेटा जालसाजी और षड्यंत्र: क्या पिछली तारीखों में ईमेल का रिकॉर्ड मैनिपुलेट (हेरफेर) किया गया या कार्मिक की गैर-मौजूदगी में किसी अधिकारी ने दुर्भावनापूर्वक इस कृत्य को अंजाम दिया?उच्च अधिकारियों (बीसीएमओ नोखा) को गुमराह करने के लिए झूठी और मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार करने वाले प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?यह मामला अब केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं,बल्कि डेटा चोरी,सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी और एक बेकसूर बिना एग्रीमेंट के स्थायी कर्मचारी को फंसाने के आपराधिक षड्यंत्र का है। विभागीय मिलीभगत की बू साफ आ रही है।जिला कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को इस गंभीर ‘ईमेल फ्रॉड’ का तत्काल संज्ञान लेते हुए दोषी अधिकारियों को सस्पेंड करना चाहिए और उनके खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।
