तहलका न्यूज,बीकानेर।राजस्थान में कॉलेज व्याख्याता बनने का सपना देख रहे हजारों युवाओं के लिए राहत भरी खबर है।लंबे इंतजार के बाद राज्य पात्रता परीक्षा (सेट) के आयोजन की घोषणा कर दी गई है। करीब 3 साल बाद होने जा रही इस परीक्षा से न केवल अभ्यर्थियों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे,बल्कि प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में व्याख्याताओं की कमी दूर करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परीक्षा की तिथि घोषित होने के साथ ही प्रतियोगी छात्रों और शिक्षण संगठनों में उत्साह का माहौल है।परीक्षा में कुल 35 विषय शामिल किए गए हैं।इच्छुक अभ्यर्थी 14 जून से 15 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। परीक्षा में 150 प्रश्न पूछे जाएंगे और प्रत्येक प्रश्न दो अंक का होगा।सबसे राहत की बात यह है कि परीक्षा में किसी प्रकार की नेगेटिव मार्किंग नहीं रखी गई है।आवेदन शुल्क वर्गवार 750,1200 और 1500 रुपए निर्धारित किया गया है।परीक्षा का पाठ्यक्रम यूजीसी नेट परीक्षा के समान रहेगा।

इसक पहले 2023 में हुआ था सेट एग्जाम
प्रदेश में सेट परीक्षा का आयोजन लंबे समय से अनियमित रूप से होता रहा है। वर्ष 2013 के बाद वर्ष 2023 में गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय,बांसवाड़ा ने परीक्षा आयोजित करवाई थी। अब एक बार फिर तीन साल बाद परीक्षा होने जा रही है।समय पर परीक्षा नहीं होने से सहायक आचार्य बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

प्रदेश में सहायक आचार्य के करीब 1000 पद रिक्त
प्रदेश में करीब एक हजार पद रिक्त बताए जा रहे हैं, लेकिन सेट परीक्षा नहीं होने के कारण योग्य अभ्यर्थी इन पदों के लिए आवेदन तक नहीं कर पा रहे थे।वहीं महाराष्ट्र,गोवा,मध्यप्रदेश,पश्चिम बंगाल,कर्नाटक,गुजरात,तेलंगाना, आंध्रप्रदेश,तमिलनाडु,हिमाचल प्रदेश,जम्मू-कश्मीर,केरल,पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में हर वर्ष नियमित रूप से सेट परीक्षा आयोजित की जाती है।इसके चलते वहां के विद्यार्थी समय पर परीक्षा उत्तीर्ण कर कॉलेज व्याख्याता बन रहे हैं,जबकि राजस्थान में लंबे अंतराल के कारण योग्य व्याख्याताओं की कमी महसूस की जा रही है।

युवाओं में जगी नई उम्मीद
शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि जब यूजीसी की ओर से नेट परीक्षा वर्ष में दो बार आयोजित की जाती है तो राज्य में भी सेट परीक्षा प्रतिवर्ष होनी चाहिए। उन्होंने 2024, 2025 और 2026 तक के रिक्त पदों के अनुसार अभ्यर्थियों को परीक्षा में उत्तीर्ण करने की मांग की है।इस घोषणा से बेरोजगार युवाओं में उम्मीद जगी है कि अब उच्च शिक्षा में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।