जिला प्रमुख चुनाव:कांग्रेस का गढ़ ढहा पाएगी भाजपा या फिर दोहराया जाएगा इतिहास?
तहलका न्यूज,बीकानेर।प्रदेश में सत्ता भाजपा की रही हो या कांग्रेस की,बीकानेर जिला परिषद में जिला प्रमुख की कुर्सी पर कांग्रेस ने दबदबा बनाए रखा।वर्ष 1959 से 2026 तक लगातार जिला परिषद में कांग्रेस की सरकार बनी,लेकिन भाजपा आज तक जिला प्रमुख नहीं बना पाई।अब एक बार फिर प्रदेश में भाजपा की सरकार है और पार्टी जिला प्रमुख बनाने का दावा कर रही है।दूसरी ओर,कांग्रेस अपने पुराने सियासी अनुभव के दम पर भाजपा की राह रोकने की रणनीति में जुटी हुई है।पार्टी सभी पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट कर जिला प्रमुख की कुर्सी पर कब्जा बरकरार रखने की कोशिश कर रही है।ऐसे में इस बार जिला प्रमुख का चुनाव केवल संख्या बल का नहीं,बल्कि पुराने सियासी इतिहास को दोहराने और बदलने की लड़ाई भी बन गया है।इस बार परिसीमन के कारण जिला परिषद में वार्डों की संख्या 41 हो गई है।
कब कौन बना जिला प्रमुख
बीकानेर में वर्ष 1959 से अब तक 14 जिला प्रमुख बन चुके हैं।
प्रेम सिंह (वर्ष 1960 से 1965 तक)
गिरधारी लाल भोबिया (दो बार)
कांता खतूरिया (दो बार)
भवानीशंकर शर्मा
पूर्णाराम चौहान
सुनीता तर्ड
रामेश्वर डूडी (दो बार)
नारायण (कार्यवाहक)
मेघाराम महिया
सुशीला सींवर
मोडाराम (दिसंबर 2020 में निर्वाचित
तीन जने दो-दो बार जिला प्रमुख,तीन महिला नेताओं के नाम दर्ज है इतिहास
बीकानेर जिला परिषद में तीन नेता ऐसे है।जो दो-दो बार जिला प्रमुख बने है।इनमें गिरधारी लाल भोबिया,कांता खतूरिया व रामेश्वर डूडी शामिल है।जिन्हें दो बार जिला प्रमुख की कुर्सी संभालने का मौका मिला है।वहीं तीन महिलाओं ने जिला प्रमुख बनकर इतिहास रचा है।महिला नेतृत्व की बात करें तो कांता खतूरिया का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।उन्होंने पहली बार 1980 से 1985 तक जिला प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली।इसके बाद 1985 से 1987 तक भी वह इस पद पर रहीं।इस तरह कांता खतूरिया दो बार जिला प्रमुख बनने वाली महिला जनप्रतिनिधि रही।इसके बाद सुनीता तर्ड ने वर्ष 2000 से 2005 तक जिला प्रमुख के रूप में कार्य किया।वहीं,सुशीला सींवर वर्ष 2015 से 2020 तक इस पद पर रहीं। इन तीनों महिला नेताओं के चार कार्यकाल के बाद अब पांचवीं बार महिला जिला प्रमुख बनने का रास्ता साफ हुआ है।
ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
हमारे चैनल से जुड़ें और सभी अपडेट सबसे पहले पाएं