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फर्जी मुख्तियारनामे के मामले में न्यायालय का अहम आदेश,चार साल बाद फिर खुलेंगी फाइल

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फर्जी मुख्तियारनामे के मामले में न्यायालय का अहम आदेश,चार साल बाद फिर खुलेंगी फाइल

तहलका न्यूज,बीकानेर।फर्जी मुख्तियारनामा आम तैयार कर कीमती भूमि के हस्तांतरण के गंभीर आरोपों से जुड़े प्रकरण में न्यायालय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक  मजिस्ट्रेट संख्या-02 बीकानेर ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए अग्रिम अनुसंधान के निर्देश दिए हैं।परिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता अनिल सोनी की पैरवी के परिणामस्वरूप न्यायालय ने विवादित मुख्तियारनामे पर अंकित हस्ताक्षरों की विधि विज्ञान प्रयोगशाला से जांच  करवाने का आदेश दिया है।प्रकरण के अनुसार आरोपी लालचंद गौड़ एवं नेमाराम पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से फर्जी मुख्तियारनामा आम तैयार कर संजय सिंह के फर्जी हस्ताक्षर किए तथा संजय सिंह के नाम से स्टांप प्राप्त कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किया।आरोप है कि नेमाराम ने उक्त मुख्तियारनामे के आधार पर संजय सिंह की बेशकीमती भूमि लालचंद गौड़ के नाम हस्तांतरित कर दी तथा बाद में लालचंद गौड़ ने उक्त भूमि अपने नाम से खरीद ली।मामले का पता चलने पर परिवादी युद्धवीर सिंह एवं संजय सिंह ने पुलिस थाना सदर बीकानेर में प्रथम  सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाई।परिवादी पक्ष का आरोप है कि प्रकरण का अनुसंधान अन्य थाना अधिकारी को स्थानांतरित होने के बाद निष्पक्ष अनुसंधान नहीं किया गया तथा विवादित मुख्तियारनामे पर अंकित संजय सिंह के हस्ताक्षरों की स्नस्रु जांच करवाए बिना ही जल्दबाजी में मामले को झूठा मानते हुए अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया गया।पुलिस अनुसंधान से असंतुष्ट होकर परिवादी युद्धवीर सिंह ने अधिवक्ता अनिल सोनी के माध्यम से न्यायालय में अग्रिम अनुसंधान करवाने हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। प्रार्थना पत्र में विवादित मुख्तियारनामे पर अंकित हस्ताक्षरों की वैज्ञानिक जांच करवाने तथा प्रकरण के महत्वपूर्ण तथ्यों  का पुन: अनुसंधान किए जाने की मांग की गई।प्रकरण की सुनवाई करते हुए न्यायालय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-02 बीकानेर की पीठासीन अधिकारी माधवी मोदी ने परिवादी  का प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए थानाधिकारी पुलिस थाना सदर को निर्देशित किया कि विवादित मुख्तियारनामे पर अंकित संजय सिंह के हस्ताक्षरों का विधि विज्ञान प्रयोगशाला से परीक्षण करवाकर जांच परिणाम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि कूटरचना से संबंधित मामलों में विवादित दस्तावेजों की एफएसएल जांच करवाए बिना अनुसंधान के निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।परिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता अनिल सोनी ने पैरवी की।

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