केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने छावनी में सैनिकों के साथ साझा की दीपावली की खुशियां
तहलका न्यूज,बीकानेर।केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने दीपावली के उपलक्ष्य में आज बीकानेर छावनी का दौरा किया तथा भारतीय सेना के जवानों के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं। इस अवसर पर उन्होंने सैनिकों के साथ दीप प्रज्वलित किए और उन्हें दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।मेघवाल ने देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात तत्पर रहने वाले सैनिकों के अदम्य साहस, समर्पण और बलिदान की सराहना करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए सैनिकों का योगदान अतुलनीय है।उन्होंने सैनिकों के साथ-साथ उनके परिवारों के त्याग और समर्पण के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की।इस अवसर पर अर्जुन राम मेघवाल ने प्रस्तावित लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह सैन्य संग्रहालय परियोजना के संबंध में सैन्य अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की।उन्होंने इस महत्वपूर्ण परियोजना के विकास एवं निर्माण कार्यों को गति देने के उद्देश्य से अपनी सांसद निधि से 20 लाख रुपये देने की घोषणा की।उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय बीकानेर और राजस्थान की गौरवशाली सैन्य विरासत,वीरता की परंपरा तथा भारतीय सेना के ऐतिहासिक योगदान को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।यह परियोजना विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रभक्ति,सैन्य चेतना और देशसेवा के प्रति समर्पण की भावना जागृत करने में सहायक होगी।
राजस्थान की माटी के सपूत थे लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह
लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह,पीवीएसएम,राजस्थान की माटी के ऐसे वीर सपूत थे,जिन्होंने अपनी असाधारण वीरता,रणनीतिक कौशल और अद्वितीय सैन्य नेतृत्व से भारतीय सैन्य इतिहास में अमिट स्थान बनाया।14 जुलाई 1919 को तत्कालीन बीकानेर रियासत के कुसुमदेसर गांव (वर्तमान चूरू जिला) में जन्मे सगत सिंह ने अपने सैन्य जीवन की शुरुआत बीकानेर गंगा रिसाला से की थी।अपनी प्रतिभा,साहस और नेतृत्व क्षमता के बल पर वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद तक पहुंचे। उनकी जीवन यात्रा राजस्थान की सैन्य परंपरा,शौर्य और राष्ट्रसेवा के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है।उन्होंने वर्ष 1961 में गोवा मुक्ति अभियान के दौरान 50 पैराशूट ब्रिगेड का नेतृत्व किया।वर्ष 1967 में सिक्किम के नाथू ला क्षेत्र में चीनी सेना के विरुद्ध भारतीय सैनिकों के दृढ़ प्रतिरोध में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।वहीं,वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने मेघना नदी पार कर ढाका की ओर ऐतिहासिक सैन्य अभियान को अंजाम दिया, जिसने बांग्लादेश की मुक्ति में निर्णायक भूमिका निभाई।उनकी विशिष्ट सैन्य सेवाओं के लिए उन्हें पद्म भूषण एवं परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।
बीकानेर की सैन्य विरासत को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान
मेघवाल ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रस्तावित लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह सैन्य संग्रहालय बीकानेर को राष्ट्रीय स्तर पर सैन्य विरासत, इतिहास और पर्यटन के एक प्रतिष्ठित केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय केवल सैन्य इतिहास का दस्तावेज नहीं होगा,बल्कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के शौर्य,पराक्रम और राष्ट्रनिष्ठा को सम्मान देने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।उन्होंने संबंधित सैन्य एवं प्रशासनिक अधिकारियों से परियोजना के क्रियान्वयन में आवश्यक समन्वय, उच्च गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि इस महत्वपूर्ण परियोजना को शीघ्र मूर्त रूप दिया जा सके।सांसद निधि से घोषित 20 लाख रुपये इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोगी होंगे। प्रस्तावित सैन्य संग्रहालय बीकानेर की गौरवशाली सैन्य परंपरा को नई पहचान देने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देने वाला महत्वपूर्ण केंद्र साबित होगा।
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