बुजुर्गों के थिरकते कदमों ने बताया, खुशियों की कोई उम्र नहीं होती
तहलका न्यूज,बीकानेर।दीपावली पर जब अपने घरों में परिवार के लोग एक-दूसरे के साथ खुशियां बांट रहे थे,तब अपनाघर वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए रोटरी के सदस्य उनके बीच मौजूद थे।भजनों की धुन पर थिरकते कदम, गीत गाते बुजुर्ग,तालियों की गूंज और खिलखिलाते चेहरे इस बात का अहसास करा रहे थे कि खुशियों के लिए उम्र नहीं, अपनों का साथ जरूरी होता है।मौका था रोटरी क्लब ऑफ बीकानेर रॉयल्स एवं रोटरी क्लब ऑफ बीकानेर अपराइज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘एक दिवाली, मुस्कुराहट वाली’ कार्यक्रम का। श्री जय दुर्गा मंडल के सहयोग से आयोजित इस समारोह में दीपावली की खुशियां बुजुर्गों के साथ साझा की गईं।रोटरी क्लब रॉयल्स के सह प्रांतपाल आनंद आचार्य ने बताया कि कार्यक्रम के लिए वृद्धाश्रम परिसर को रंगोलियों और दीपमालाओं से सजाया गया। भजन-गायन और संगीत की प्रस्तुतियों के बीच माहौल ऐसा बना कि बुजुर्ग खुद को नाचने-गाने से रोक नहीं पाए। कई बुजुर्गों ने गीत गुनगुनाए तो कई संगीत की धुन पर थिरकते नजर आए। रोटरी सदस्यों ने भी उनके साथ नृत्य और गायन में भाग लेकर उत्सव को पारिवारिक मिलन का रूप दिया।क्लब अध्यक्ष विपिन लड्ढा ने बताया कि दीपावली के अवसर पर सभी बुजुर्गों को फल और मिठाइयां वितरित की गईं।रंगोली,दीपमाला और आतिशबाजी के साथ पूरे परिसर में उत्सव का माहौल रहा।उन्होंने कहा कि आयोजन का उद्देश्य बुजुर्गों के साथ समय बिताना और उन्हें परिवार जैसा अपनत्व देना था।श्री जय दुर्गा मंडल की ओर से गीतों की श्रृंखला प्रस्तुत की गई।मंडल अध्यक्ष मनीष बवेजा,संयोजक शिवम शुक्ला,गीतकार राज किराडू,राज पुरोहित,रोटेरियन डॉ.पुनीत खत्री,डॉ.सीएस मोदी और डॉ.मनोज सांवल ने अपनी प्रस्तुतियों से बुजुर्गों और रोटरी सदस्यों को झूमने पर मजबूर कर दिया।कार्यक्रम में गीत-संगीत के साथ बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी समारोह का सबसे यादगार पक्ष रही।रोटेरियन अमित अग्रवाल ने बताया कि रोटरी सदस्यों ने बुजुर्गों के साथ आत्मीय संवाद किया और उनके अनुभव सुने।उनके साथ बैठकर समय बिताया और दीपावली की खुशियां साझा कीं। बुजुर्गों के लिए यह आयोजन केवल त्योहार मनाने का अवसर नहीं, बल्कि सामाजिक जुड़ाव और अपनत्व महसूस करने का मौका भी बना।कोषाध्यक्ष राजेश खत्री ने बताया कि इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें क्लब के सदस्यों ने अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार योगदान दिया। किसी ने मिठाई का सहयोग किया तो किसी ने फल और आतिशबाजी की व्यवस्था की।कई सदस्यों ने आर्थिक सहयोग देकर आयोजन को सफल बनाने में भागीदारी निभाई।विपिन लड्ढा,राजेश पारीक, डॉ.पुनीत खत्री,राजेश बवेजा,जगदीप सिंह औबराय,शिशिर शर्मा,ज्योति प्रकाश रंगा,डॉ.मनोज कुड़ी,निखिल सेठिया,सुनील चमड़िया,डॉ.चक्रवर्ती श्रीमाली,हेमंत आसोपा,डॉ.राकेश माथुर,श्रवण कुमार सैनी,डॉ.राहुल रॉय,डॉ.मनोज गौर,विनोद कुमार माली,अमित अग्रवाल,राकेश मोदी,महेश अग्रवाल, डॉ.सीएस मोदी,आनंद आचार्य,गोविंद भादू,रमेश अग्रवाल, ऋषभ जैन,शिवेंद्र दाधीच,डॉ.वीएस आचार्य,सुरेंद्र सिंह,अभिषेक आचार्य,अश्वनी मिड्ढा,जगदीश थरेजा,मुकुल झांब,अरुण पुरोहित,हरजीत सिंह,विशाल कुक्कड़,अनिल कुक्कड़ और डॉ.आरके धुरिया सहित सदस्यों ने सहयोग किया।विनोद कुमार माली ने मिठाई,मुकुल झांब ने फल और राजेश खत्री ने आतिशबाजी का सहयोग दिया।कार्यक्रम में बुजुर्गों के चेहरों पर नजर आई खुशी ने आयोजन के उद्देश्य को सार्थक कर दिया।दीपावली की रोशनी तो कुछ समय बाद बुझ जाएगी, लेकिन अपनों के साथ बिताए इन पलों की याद उनके मन में लंबे समय तक बनी रहेगी। एक दिवाली,मुस्कुराहट वाली’ ने यही संदेश दिया कि त्योहारों का असली अर्थ केवल अपने घर को रोशन करना नहीं,बल्कि किसी दूसरे के जीवन में भी खुशियों का दीप जलाना है।
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