तहलका न्यूज,बीकानेर।स्वास्थ्य विभाग की प्रयोगशाला सहायक भर्ती—2018 में फर्जीवाड़े और कूटरचित हस्ताक्षरों के जरिए अपात्रों को नौकरी दिलाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।राजस्थान सरकार के संपर्क पोर्टल पर दर्ज परिवाद (क्रमांक:—1718) के बाद अब इस पूरे प्रकरण के मुख्य दस्तावेज और मुख्य शिकायतकर्ताओं के नाम भी सामने आ गए हैं।मामले के अनुसार,अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाण-पत्रों के सत्यापन से जुड़ी आख्या मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय,हनुमानगढ़ के डिस्पेच नंबर 7762 एवं 7765 (दिनांक: 19/06/2018) के तहत जारी की गई थी।ये दोनों ही डिस्पेच नंबर सीएमएचओ कार्यालय हनुमानगढ़ के ही हैं।गंभीर बात यह है कि दोनों डिस्पेच पत्रों पर दर्ज सत्यापन आख्या में संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं,बीकानेर जोन के जो हस्ताक्षर मौजूद हैं,वे आपस में मेल नहीं खाते और पूरी तरह भिन्न व संदिग्ध प्रतीत होते हैं।शिकायतकर्ता किशन गोपाल छंगाणी का स्पष्ट आरोप है कि जब पत्रावली हनुमानगढ़ कार्यालय से बीकानेर ले जाने,सत्यापन करवाने और पुन:लाने की वैधानिक जिम्मेदारी सीएमएचओ हनुमानगढ़ के संबंधित लिपिक/कार्मिक की थी,तो एक ही दिन के दो डिस्पेच पत्रों पर संयुक्त निदेशक के जाली/कूटरचित हस्ताक्षर किसकी शह पर और किसके द्वारा किए गए? मूल रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बाद भी अब तक एफएसएल जाँच न होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

बीकानेर संभाग में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का अंदेशा
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बीकानेर मंडल से तैयार हुआ यह फर्जी सत्यापन खेल केवल हनुमानगढ़ तक सीमित नहीं है।यदि बीकानेर जोन कार्यालय के स्तर पर संयुक्त निदेशक के जाली हस्ताक्षरों से आख्या तैयार की गई है,तो इस आधार पर बीकानेर संभाग के अन्य जिलों—चूरू,श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में भी कई अपात्र अभ्यर्थी फर्जी दस्तावेजों के दम पर सरकारी नौकरी हथिया चुके हैं।यदि संभाग स्तर पर जारी सभी अनुभव प्रमाण-पत्रों और उनकी सत्यापन आख्याओं की निष्पक्ष फॉरेंसिक जाँच कराई जाए,तो राजकीय धन का गबन करने वाले कई अपात्र कर्मचारियों और विभागीय साठगांठ का बड़ा पर्दाफाश हो सकता है।

5 दिन में कार्रवाई न होने पर एसीबी और हाई कोर्ट जाने की चेतावनी
परिवाद में संयुक्त रूप से मांग की गई है कि डिस्पेच नंबर 7762 व 7765 से संबंधित ड्यूटी ऑर्डर,टीए/डीए बिल और पत्रावली को तत्काल सील(जब्त) कर हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जाँच कराई जाए।दोषी कार्मिकों,जाली हस्ताक्षर करने वालों और लाभान्वित अभ्यर्थियों पर बीएनएस की धाराओं एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज हो।कूटरचित आख्या के आधार पर नियुक्त अभ्यर्थियों को तुरंत बर्खास्त कर उनसे अब तक दिए गए वेतन की ब्याज सहित वसूली की जाए।परिवादियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 5 दिनों के भीतर इस प्रकरण पर ठोस व पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो मामले को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो एसीबी और उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।