'मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना' में बिना अनुबंध बंद फर्म से लूटा बजट
एम.एस. कौशल कम्प्यूटर का टिन नंबर और बिना अनुबंध के संविदा का फर्जीवाड़ा
तहलका न्यूज,बीकानेर।सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) पांचू में 'मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना' की आड़ में न केवल सरकारी बजट की खुली लूट की गई,बल्कि कर्मचारियों के बुनियादी संवैधानिक व सेवा अधिकारों को पैरों तले कुचलने का एक ऐसा भयावह मामला सामने आया है जिसने समूचे प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। योजना के तहत बिना किसी अनुबंध और बिना किसी सेवा ब्रेक के निरंतर सेवाएं दे रहे राज्य सरकार के वास्तविक स्थायी कर्मचारियों के भारत के संविधान प्रदत्त गरिमापूर्ण जीवन,आजीविका की समानता और वैधानिक सेवा अधिकारों का खुला हनन किया गया।इन कार्मिकों को कागजी कूटनीति के जरिए बंद फर्म की आड़ में जबरन 'निविदा व संविदा कर्मी' बना दिया गया और उनके संवैधानिक अधिकारों का गला घोंट दिया गया।
अल्पवेतनभोगियों के पेट पर लात: तय पगार से बेहद कम थमाया गया नगद भुगतान
घोटाले की परतें उजागर करती हैं कि स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदारों ने सरकारी रिकॉर्ड में तो पूरा बजट और पूरी पगार आहरित दिखाई,लेकिन धरातल पर चौबीसों घंटे काम करने वाले अल्पवेतनभोगी कर्मचारियों को उनके तय पारिश्रमिक से बहुत कम नगद राशि दी गई।बैंक खातों के बजाय कम नगद भुगतान की यह सुनियोजित व्यवस्था इसलिए बनाई गई ताकि बाकी बची राशि को भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों का सिंडिकेट आसानी से डकार सके। कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों और तय मजदूरी पर डाका डालकर इस संगठित शोषण को वर्षों तक बेधड़क चलाया गया।
बीसीएमओ नोखा और योजना के नोडल प्रभारी की संदिग्ध भूमिका
इस पूरे मामले में ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी नोखा और 'मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना' के नोडल प्रभारी की भूमिका सीधे तौर पर जांच के घेरे में आ गई है।पूरे ब्लॉक के स्वास्थ्य संस्थानों और वित्तीय स्वीकृतियों की शीर्ष निगरानी बीसीएमओ नोखा के अधीन होती है।ऐसे में यह सवाल सीधे बीसीएमओ की कार्यशैली पर चोट करता है कि उनकी नाक के नीचे वर्षों तक एक मृतप्राय फर्म के नाम पर फर्जी बिल कैसे पास होते रहे और बिना अनुबंध के कर्मचारियों का शोषण कैसे चलता रहा? योजना के नोडल प्रभारी और बीसीएमओ नोखा ने इस संस्थागत फर्जीवाड़े पर आंखें क्यों मूंद रखी थीं? क्या यह सिर्फ घोर लापरवाही थी या फिर इस पूरे वित्तीय सिंडिकेट और कमीशनखोरी में ब्लॉक स्तर के इन शीर्ष अधिकारियों की भी बराबर की हिस्सेदारी और मौन सहमति थी?बिना उच्च स्तरीय प्रशासनिक शह के इतना बड़ा खेल लंबे समय तक चलना असंभव था।
मुर्दा फर्म एम.एस. कौशल कम्प्यूटर का टिन नंबर और बिना अनुबंध के संविदा का फर्जीवाड़ा
शिकायत में पेश पुख्ता साक्ष्यों के अनुसार 'एम. एस. कौशल कम्प्यूटर प्लेसमेंट एजेंसी' (टिन नंबर 08591311765) अप्रैल 2013 में ही आधिकारिक तौर पर बंद हो चुकी थी। इसके बावजूद अस्पताल के भ्रष्ट तंत्र और एनएचएम लेखाकार ने 31 मार्च 2016 और उसके बाद तक इस निष्प्रभावी फर्म के टिन नंबर का उपयोग कर धड़ल्ले से सरकारी बिल पास करवाए और भारी वित्तीय गबन किया।योजना में कार्यरत कर्मचारियों का इस फर्म से कभी कोई अनुबंध हुआ ही नहीं था,फिर भी बंद फर्म का मुखौटा लगाकर उन्हें जबरन संविदा कर्मी दर्शाया गया और सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।साजिश छिपाने के लिए 2024 में दस्तावेजों की प्रति देने का बहाना बनाकर जबरन बैकडेट में हस्ताक्षर करवाने का दुस्साहससालों तक अल्पवेतनभोगियों का संवैधानिक व आर्थिक शोषण करने और बंद फर्म के जरिए बजट लूटने के बाद जब इस महाघोटाले के सबूत बाहर आने लगे,तो जिम्मेदारों ने खुलेआम गुंडागर्दी की।परिवादी किशन गोपाल के अनुसार,एनएचएम लेखाकार शशि कुमार व्यास और कृष्णकांत पुरोहित ने 24 जून 2024 को सुनियोजित षड्यंत्र रचकर दस्तावेजों की प्रति देने का झांसा दिया और गलत तरीके से दबाव बनाकर वर्ष 2016 की पिछली तारीखों (बैकडेट) वाले फर्जी एग्रीमेंट पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए।यह कृत्य साबित करता है कि पूर्व में कोई वैध अनुबंध अस्तित्व में था ही नहीं और अपनी गर्दन बचाने के लिए शारीरिक हमले व कूटनीति का सहारा लिया गया।
मौन हैं संभागीय आयुक्त और वाणिज्य कर अधिकारी
अल्पवेतनभोगियों के संवैधानिक अधिकारों के हनन,वेतन में खुली कटौती, बंद फर्म से टैक्स चोरी और भारी वित्तीय गबन के ठोस साक्ष्य 15 अक्टूबर 2026 को ही राजस्थान संपर्क पोर्टल के जरिए वाणिज्य कर अधिकारी और संभागीय आयुक्त कार्यालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं।लेकिन इतने गंभीर और अमानवीय शोषण के खुलासे के बावजूद दोनों उच्च प्रशासनिक महकमे अब तक पूरी तरह चुप्पी साधे बैठे हैं।सवाल उठता है कि क्या गरीबों के अधिकारों को कुचलने और सरकारी खजाना लूटने वाले रसूखदारों को प्रशासनिक संरक्षण हासिल है?
थाने में परिवाद दर्ज,सभी दोषियों पर एफआईआर की मांग
प्रशासनिक उपेक्षा के चलते 27 अक्टूबर को थानाधिकारी पांचू व पुलिस अधीक्षक बीकानेर को परिवाद सौंपकर सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। परिवादी ने मांग की है कि मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना में अल्पवेतनभोगियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करने,पगार से कम भुगतान कर बाकी राशि डकारने, बंद फर्म से करोड़ों का गबन करने और दबाव बनाकर बैकडेट में जबरन हस्ताक्षर क राने वाले एनएचएम लेखाकार शशि कुमार व्यास,कृष्णकांत पुरोहित,बीसीएमओ नोखा,योजना के नोडल प्रभारी व कनिष्ठ विशेषज्ञ प्रभारी के खिलाफ तत्काल नामजद एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
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