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प्रिसेंस राज्यश्री कुमारी ने सिद्धि कुमारी से मांगा स्पष्टीकरण

KHAOSA
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प्रिसेंस राज्यश्री कुमारी ने सिद्धि कुमारी से मांगा स्पष्टीकरण


तहलका न्यूज,बीकानेर।अपने पिता के स्व महाराज लालसिंह के त्याग,बलिदान,विनम्रता,उदार हृदयता,विवेकशीलता और दूरदर्शिता को ध्यान में रखते हुए महाराजा गंगासिंहजी ने एक महल का निर्माण निर्माण करवाया तथा इसका नाम अपने पिता की स्मृति में लालगढ़ पैलेस रखा।इसी लालगढ़ पैलेस के प्रवेश द्वार,क्लॉक टॉवर गेट सामने अपने पिता स्व.महाराज लालसिंह की संगमरमर की आदमकद ऐतिहासिक एवं भव्य प्रतिमा बनवाई जो कि लालगढ़ पैलेस में आने वाले आगन्तुकों का सबसे पहले स्वागत करती हैं।यह प्रतिमा पारंपरिक राजपूति पोशाक (छोगा) पहने तथा गर्दन बड़े बड़े मोतियों और पन्नों की बूंदो से सजी माला से अलंकृत हैं। साथ ही उनके हाथ में हल्की तलवार है,जो उनकी गरिमा को दर्शाती है।इस प्रतिमा का अनावरण वर्ष 1915 में भारत के वायसराय लॉर्ड हार्डिंग ने किया था।उनकी यह भव्य और प्रभावशाली मुद्रा की प्रतिमा वर्तमान समय में ना सिर्फ बीकानेर राजपरिवार बल्कि सम्पूर्ण देश की ऐतिहासिक धरोहर हैं।प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी,अपने परदादा ख. महाराजा गंगासिंहजी की भावना को ध्यान में रखते हुए तथा इस प्रतिमा की भव्यता और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए समय समय पर इसकी साफ-सफाई व देखरेख का काम उच्च स्तरीय शिल्पकारों और ऐतिहासिक स्मारक संरक्षण विशेषज्ञों की सलाह व देखरेख में करवाती रही है जिससे कि संगमरमर की भव्य व ऐतिहासिक प्रमिमा का मूल खरुप कायम रखा जा सके।अभी हॉल की में प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी के ध्यान में आया कि उक्त महाराज की प्रतिमा पर साफ-सफाई व देखरेख का कार्य किया जा रहा है।पुछने पर ज्ञात हुआ कि सिद्धि कुमारी की देखरेख व आदेशनुसार यह साफ सफाई और जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है।कार्य के दौरान मूर्ति को कपड़े से पूरी तरह ढगा हुआ था।कई महिनों तक यह मूर्ति इसी तरह ढकी हुई रखी गई और जब इसे कथित साफ-सफाई और जीर्णोद्धार कार्य के बाद खोला गया तो यह देखकर झटका लगा क्योकि मूर्ति अपना मूल खरुप खो चुकी हैं, संगमरमर अपना मूल अस्तित्व व चमक खो चुका था,इस मूर्ति पर महाराजश्री लालसिंह के जीवनकाल पर उकेरा गया विवरण मिट गया है तथा मूर्ति के मूल खरुप में काफी परिवर्तन आ गया है।ऐसा प्रतित होता है कि मूर्ति की साफ-सफाई बिना किसी ऐतिहासिक स्मारक संरक्षण विशेषज्ञों की सलाह लिए किसी कठोर रसायन का उपयोग करते हुए की गई हैं।इस तरह का गैरजिम्मेदारान कार्य ना सिर्फ हमारे पूर्वजों के आत्मसम्मान व लोकप्रियता का अपमान हैं बल्कि इस ऐतिहासिक एवं भव्य धरोहर के संरक्षण के नाम पर खिलवाड़ है।इस गैरजिम्मेदारान कार्य के लिए प्रिंसेस राज्यश्री कुमारी ने अपनी भतीजी सिद्धि कुमारी को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा है कि उक्त कार्य उन्होंने किसके कहने पर किया और इसकी क्या जरुरत थी,साथ ही बीकानेर राजपरिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्यों से इस बारे में सलाह क्यो नही ली गई।

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