13 नवंबर को मार्गी हो जाएंगे बुध,दिखेंगे कई बदलाव
तहलका न्यूज,बीकानेर।ग्रहों की चाल में बदलाव के बीच 31 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।ज्योतिषीय गणना के अनुसार गुरु का ये गोचर 11 साल 3 माह बाद हो रहा है।इससे पहले गुरु 14 जुलाई 2015 से 11 अगस्त 2016 तक सिंह राशि में रहे थे।पं.सूरज नारायण व्यास के अनुसार बृहस्पति ज्ञान,धर्म,शिक्षा,संतान,विवाह,न्याय,धन और नैतिकता के कारक हैं। सिंह राशि नेतृत्व,प्रतिष्ठा,शासन और अधिकार से जुड़ी है।ऐसे में गुरु के गोचर से शिक्षा,शैक्षणिक संस्थानों,न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े विषय अहम हो सकते हैं।अर्थव्यवस्था और कारोबार में निवेश,उद्यमिता तथा कारोबारी नेतृत्व से जुड़े फैसले महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सामाजिक जीवन में परंपरा,धार्मिक आस्था और जिम्मेदारी पर जोर रहने की संभावना है।बुध 24 अक्टूबर को तुला राशि में वक्री हुए हैं और 12 नवंबर तक इसी स्थिति में रहेंगे। वे 13 नवंबर को मार्गी होंगे।ज्योतिषीय आकलन के अनुसार इस अवधि में शिक्षा और अध्यात्म के रुके काम दोबारा शुरू होने,व्यापार और नौकरी के लंबित प्रस्तावों की समीक्षा होने के संकेत हैं।शेयर बाजार और सोने-चांदी के भावों में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।इस दौरान पुराने काम दोबारा गति पकड़ सकते हैं,अटकी हुई बातचीत आगे बढ़ सकती है और पहले किए गए प्रयासों का लाभ मिलने की संभावना बन सकती है।खासतौर पर मेष,कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए अच्छी खबर मिलने के संकेत बताए जा रहे हैं।ज्योतिष में बुध को बुद्धि,वाणी,तर्क,व्यापार और संवाद का कारक माना जाता है।बुध के वक्री होने की अवधि को पुराने फैसलों की समीक्षा करने,अधूरे काम पूरे करने और जरूरी दस्तावेजों को दोबारा जांचने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।इस दौरान कुछ कामों में देरी या बातचीत में गलतफहमी की स्थिति बन सकती है ऐसे में धैर्य से काम लेना और किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना बेहतर रहेगा।
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