व्यास दंपति को मिली डॉक्ट्रेट की उपाधि
पति को गणित और पत्नी को भौतिक विज्ञान विषय में मिली डॉक्ट्रेट की उपाधि
तहलका न्यूज,बीकानेर।शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए अरुण व्यास एवं उनकी पत्नी प्रेमलता व्यास को एक साथ एसकेडीयू विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्ट्रेट की उपाधि प्रदान की गई है।दोनों ने गणित एवं भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में अपने-अपने शोध कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए हैं।अरुण व्यास ने गणित विषय में "ए स्टडी ऑन डिस्क्रीट प्रोबबिलिटी डिस्ट्रीब्यूशनस यूजिंग यूआरएन मॉडल्स " विषय पर शोध कार्य किया। उनके शोध में यूआरएन मॉडल्स के माध्यम से असतत प्रायिकता वितरण (डिस्क्रीट प्रोबबिलिटी डिस्ट्रीब्यूशनस ) के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया गया है। शोध कार्य के माध्यम से प्रायिकता सिद्धांत एवं उससे जुड़े गणितीय मॉडलों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया गया है।अरुण व्यास ने अपना शोध डॉ अरविन्द कुमार भारद्वाज के निर्देशन मे सम्पूर्ण किया है ।अरुण व्यास इससे पहले गणित विषय में स्नातकोत्तर के अलावा राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में एम.टेक भी हैं।अरुण व्यास वर्तमान में सेंट पब्लिक सी.से. स्कूल के निदेशक है और बीकानेर की अनेक प्रतिष्ठित कॉलेज और विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य के रूप में सेवाए दे रहे हैं।वहीं प्रेमलता व्यास ने भौतिक विज्ञान विषय में "ए स्टडी ऑफ़ डिस्क्रीट नॉनलीनियर श्रोंडीजर एक्वेशन एंड इट्स एप्लीकेशन इन ऑप्टिकल लैटिसेज़" विषय पर शोध कार्य किया।उनके शोध में डिस्क्रीट नॉनलीनियर श्रोंडीजर एक्वेशन तथा इसके ऑप्टिकल लैटिसेज़ में अनुप्रयोगों का अध्ययन किया गया है।यह शोध आधुनिक गणितीय भौतिकी, नैनोटेक्नोलॉजी एवं प्रकाशिकी के क्षेत्र से संबंधित है।प्रेमलता व्यास ने अपना शोध डॉ अजय कुमार के निर्देशन मे सम्पूर्ण किया है।प्रेमलता व्यास वर्तमान में सीएमसी इंस्टिट्यूट की निदेशक है और बीकानेर की अनेक प्रतिष्ठित कॉलेज में सहायक आचार्य के रूप में सेवाए दे चुकी हैं।विशेष बात यह है कि अरुण व्यास और प्रेमलता व्यास ने पति-पत्नी होते हुए एक साथ अपने-अपने विषयों में शोध कार्य पूर्ण कर डॉक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त की,जो उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ शैक्षणिक जगत में भी प्रेरणादायक उदाहरण है।दोनों की इस उपलब्धि पर परिवारजनों,मित्रों, शिक्षाविदों एवं शुभचिंतकों ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। दोनों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने शोध निर्देशकों, परिवारजनों, शिक्षकों एवं शुभचिंतकों के मार्गदर्शन और सहयोग को दिया।पति-पत्नी द्वारा एक साथ डॉक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त करना न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम,लगन और शैक्षणिक प्रतिबद्धता का परिणाम है, बल्कि यह आपसी सहयोग और जीवनसाथी के रूप में एक-दूसरे को निरंतर प्रोत्साहित करने की भावना का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।
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